पटियाला 11 जनवरी( दैनिक खबरनामा )पटियाला और चंडीगढ़ के बीच तेज़ कनेक्टिविटी के दावों के बावजूद ज़मीनी हकीकत अलग नज़र आ रही है। राजपुरा बाईपास पर बन रहे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है, जिससे इस मार्ग पर रोज़ाना यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर स्थित राजपुरा फ्लाईओवर परियोजना शुरू हुए लगभग दो वर्ष हो चुके हैं,लेकिन यह कई बार तय समयसीमा चूक चुकी हैफ्लाईओवर के साथ-साथ दोनों ओर की स्लिप रोड्स पर री-कारपेटिंग का काम भी अधूरा पड़ा है, जिसके कारण यह इलाका एक बड़े ट्रैफिक बॉटलनेक में तब्दील हो गया है।इस देरी का असर न केवल पटियाला और चंडीगढ़ के यात्रियों पर पड़ा है, बल्कि मालवा क्षेत्र से दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों की ओर जाने वाले वाहनों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोज़ाना यात्रा करने वाले छात्र, मरीज, कार्यालय जाने वाले लोग और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े यात्री लंबे जाम, ईंधन की अधिक खपत और मानसिक तनाव झेल रहे हैं।इसके अलावा, पटियाला-बठिंडा क्षेत्र का व्यापार भी प्रभावित हुआ है। यह मार्ग लंबे समय से एयरपोर्ट और टियर-1 शहरों तक सुगम पहुंच का प्रमुख जरिया रहा है, लेकिन मौजूदा हालात ने स्थानीय कारोबार को नुकसान पहुंचाया है।पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के प्रोफेसर पंकज मोहिंद्रू ने बताया कि आसपास के शहरों की यात्रा अब बेहद मुश्किल हो गई है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अंबाला में पढ़ती है और राजपुरा में लगने वाले जाम के कारण पटियाला से अंबाला की यात्रा में काफी समय लग जाता है,जिससे उन्हें बार-बार लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है।
राजपुरा निवासी प्रदीप ढींगरा ने कहा कि यह समस्या केवल पटियाला तक सीमित नहीं है,बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र के लोगों को चंडीगढ़ जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि या तो निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए या फिर यातायात के लिए कोई वैकल्पिक और सुव्यवस्थित व्यवस्था की जाए, ताकि हजारों दैनिक यात्रियों को राहत मिल सके।
वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का कहना है कि फ्लाईओवर परियोजना के मार्च तक पूरा होने की संभावना है।