हिमाचल प्रदेश 8 फरवरी 2026 ( दैनिक खबरनामा ) हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति और राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति के संभावित प्रभावों को लेकर राज्य के वित्त विभाग ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी। यह प्रस्तुति मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, मंत्रियों, विधायकों, प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और मीडिया प्रतिनिधियों के समक्ष रखी गई।प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का असर राज्य की अर्थव्यवस्था और आने वाले बजट पर लंबे समय तक पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरडीजी की समाप्ति किसी सरकार का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता के अधिकारों से जुड़ा विषय है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आरडीजी का प्रावधान खत्म कर दिया गया तो हिमाचल के लिए वित्तीय संकट और गहरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ मिलकर दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मुलाकात करने को भी वे तैयार हैं।
सुक्खू ने आरोप लगाया कि इस अहम प्रस्तुति में भाजपा विधायकों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए। उन्होंने बताया कि हिमाचल के बजट का करीब 12.7 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से आता है, जिससे यह राज्य सबसे अधिक प्रभावित होने वाला है।मुख्यमंत्री ने जीएसटी व्यवस्था पर भी चिंता जताई और कहा कि इसके लागू होने के बाद कर संग्रह दर 13-14 प्रतिशत से घटकर लगभग 8 प्रतिशत रह गई है। हिमाचल एक उत्पादक राज्य है, जबकि जीएसटी उपभोग आधारित कर प्रणाली है, जिससे प्रदेश की आमदनी पर प्रतिकूल असर पड़ा है।उन्होंने केंद्र से मांग की कि जिन बिजली परियोजनाओं ने अपना ऋण चुका दिया है, उन पर कम से कम 50 प्रतिशत रॉयल्टी राज्य को दी जाए और 40 वर्ष पूरे कर चुकी परियोजनाएं हिमाचल को लौटाई जाएं। साथ ही, मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी से जुड़े 4500 करोड़ रुपये के बकाया और शानन पावर प्रोजेक्ट की लीज समाप्ति का मुद्दा भी उठाया।
वित्त विभाग के अनुसार आरडीजी खत्म होने से राज्य के सामने गंभीर संसाधन संकट खड़ा हो गया है और विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है। सरकार ने प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया है और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का भरोसा दिलाया है।