दैनिक खबरनामा चंडीगढ़ 22 अप्रैल 2026 Punjab and Haryana High Court ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अजन्मे बच्चे की गरिमा और जीवन का अधिकार NDPS Act जैसे सख्त कानूनों से भी ऊपर है। अदालत ने वाणिज्यिक मात्रा में नशीले पदार्थ की बरामदगी के मामले में एक गर्भवती महिला को दो महीने की अंतरिम जमानत दे दी।मामले की सुनवाई Justice Subhash Mehla की पीठ के समक्ष हुई। आरोप है कि महिला के पास से करीब 3 किलो 120 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। इसके बावजूद अदालत ने कहा कि गर्भावस्था एक विशेष परिस्थिति है और ऐसे मामलों में कानून को यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला को हिरासत में ही बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इसका प्रभाव केवल मां तक सीमित नहीं रहता बल्कि बच्चे के मानसिक और सामाजिक विकास पर भी पड़ता है। कोर्ट ने Article 21 of the Indian Constitution का हवाला देते हुए कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार अजन्मे बच्चे की गरिमा को भी शामिल करता है।पीठ ने यह भी कहा कि गरिमा के साथ जीवन जीना मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है और न्यायालय का कर्तव्य है कि वह उन लोगों के हितों की रक्षा करे जो स्वयं अपने अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकते, विशेषकर अजन्मे बच्चे।इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने महिला को दो महीने की अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत विशेष परिस्थितियों के आधार पर दी गई है और इससे मामले के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।