दैनिक खबरनामा 16 मार्च 2026 बचपन में लगाए जाने वाले टीकों के असर को लेकर अक्सर यह धारणा रहती है कि समय के साथ उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है, लेकिन पीजीआई के एक नए शोध ने इस सोच को काफी हद तक गलत साबित किया है। साल 2025 में किए गए अध्ययन में पाया गया कि बचपन में लगाया गया एमएमआर (खसरा, गलसुआ और रूबेला) टीका युवावस्था तक भी शरीर को इन संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
यह शोध जर्नल ऑफ क्लिनिकल इंफेक्शियस डिजीज एंड प्रैक्टिस में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में पीजीआई के विशेषज्ञों की टीम में डॉ. सतीश कुमार रेंटापल्ला, डॉ. विकास सूरी, डॉ. हरप्रीत सिंह और डॉ. मिनी पी. सिंह सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे। शोध के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के 207 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया, जिनमें अलग-अलग आयु वर्ग के लोग और स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल थे।शोध के दौरान प्रतिभागियों के रक्त के नमूनों की जांच कर यह देखा गया कि उनके शरीर में खसरा, गलसुआ और रूबेला के खिलाफ इम्यूनोग्लोबुलिन-जी (आईजीजी) एंटीबॉडी मौजूद हैं या नहीं। जांच के परिणामों में पाया गया कि अधिकांश वयस्कों के शरीर में इन बीमारियों के खिलाफ प्रतिरक्षा बनी हुई है।अध्ययन के अनुसार 95.5 प्रतिशत प्रतिभागियों में खसरे के खिलाफ सुरक्षा देने वाली एंटीबॉडी पाई गई, जबकि 92.3 प्रतिशत लोगों में रूबेला और 82.5 प्रतिशत प्रतिभागियों में गलसुआ (मंप्स) के खिलाफ प्रतिरक्षा मौजूद थी। ये नतीजे बताते हैं कि बचपन में लगाया गया टीकाकरण लंबे समय तक प्रभावी रहता है और वयस्कों को भी इन बीमारियों से सुरक्षा देता है।शोध में यह भी सामने आया कि लगभग 80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने खसरे के टीकाकरण का इतिहास बताया, जबकि गलसुआ और रूबेला के टीकाकरण की जानकारी अपेक्षाकृत कम लोगों को थी। इसके बावजूद अधिकतर लोगों में एंटीबॉडी का पाया जाना इस बात का संकेत है कि टीकाकरण के साथ-साथ प्राकृतिक संक्रमण के बाद भी शरीर में प्रतिरक्षा विकसित हो सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर किया गया टीकाकरण समाज में मजबूत सामूहिक प्रतिरक्षा (कम्युनिटी इम्युनिटी) तैयार करता है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा काफी कम हो जाता है। हालांकि शोध में यह भी पाया गया कि कुछ स्वास्थ्यकर्मियों में इन बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता अभी भी मौजूद है। ऐसे में अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए समय-समय पर टीकाकरण की स्थिति की जांच और जरूरत पड़ने पर बूस्टर डोज देने की सलाह दी गई है।विशेषज्ञों के अनुसार बचपन में समय पर कराया गया टीकाकरण न केवल बच्चों बल्कि पूरे समाज के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए अभिभावकों को बच्चों का टीकाकरण तय समय पर कराना चाहिए और वयस्कों को भी अपने टीकाकरण के प्रति जागरूक रहना चाहिए।

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