दैनिक खबरनामा 2 अप्रैल 2026 हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को ‘राज्य किसान आयोग विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसके साथ ही प्रदेश में एक समर्पित किसान आयोग के गठन का रास्ता साफ हो गया है, जिसका उद्देश्य खेती-किसानी को मजबूत करना और किसानों की आय में सुधार करना है।कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि खेती में घटता मुनाफा, छोटे जोत और बदलते मौसम जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए यह आयोग सलाहकार की भूमिका निभाएगा। यह आयोग खेती के साथ जुड़े अन्य क्षेत्रों की भी समीक्षा कर सरकार को ठोस नीतिगत सुझाव देगा।सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर ने आयोग में वास्तविक किसानों को शामिल करने की मांग की। वहीं भाजपा विधायक हंस राज ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि खेती-बागवानी का अनुभव रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि आयोग के सदस्यों के पास कम से कम 25 साल का कृषि अनुभव और डॉक्टरेट की डिग्री होना अनिवार्य होगा, ताकि फैसले अनुभव और आंकड़ों पर आधारित हों।विधेयक के तहत आयोग में एक अध्यक्ष सहित सरकारी और गैर-सरकारी सदस्य शामिल होंगे। इसका मुख्य फोकस फसल विविधीकरण, बेहतर बाजार व्यवस्था और किसानों की शिकायतों के समाधान पर रहेगा।खास बात यह है कि आयोग को जांच करने और हर साल अपनी रिपोर्ट सरकार और विधानसभा को सौंपने की शक्ति भी दी गई है। आयोग के संचालन पर हर साल करीब 85 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसका वहन राज्य सरकार करेगी।
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