दैनिक खबरनामा 20 अप्रैल 2026 सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज से जुड़े मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि एक ही तरह की याचिकाएं बार-बार दाखिल कर न्यायालय का समय बर्बाद नहीं किया जा सकता।यह याचिका पिनाकपाणि मोहंती नाम के व्यक्ति ने दाखिल की थी, जिसमें मांग की गई थी कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भारत की आजादी का मुख्य नायक घोषित किया जाए। इसके साथ ही 21 अक्टूबर 1943 (आजाद हिंद फौज स्थापना दिवस) और 23 जनवरी (नेताजी जयंती) को राष्ट्रीय दिवस घोषित करने की भी अपील की गई थी।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने टिप्पणी की कि यह याचिका “पब्लिसिटी पाने का जरिया” प्रतीत होती है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले भी इसी तरह की मांगों को लेकर याचिका दाखिल कर चुका है, जिसे पहले ही खारिज किया जा चुका है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस तरह की हरकतें जारी रहीं तो उसकी सुप्रीम कोर्ट में एंट्री तक बंद की जा सकती है। साथ ही कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि भविष्य में इस याचिकाकर्ता द्वारा दायर किसी भी PIL को स्वीकार न किया जाए।अदालत ने दोहराया कि इस प्रकार के मुद्दों पर बार-बार याचिका दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इससे न्यायालय का कीमती समय व्यर्थ होता है।