हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने नासिक संयंत्र में बंद पड़ी सुखोई उत्पादन लाइन को दोबारा सक्रिय करने का फैसला किया है। यहां से भारतीय वायुसेना को 2027-28 से नए सुखोई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है।
दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली,10 अगस्त : भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित अपने संयंत्र में लंबे समय से बंद पड़ी सुखोई लड़ाकू विमानों की उत्पादन लाइन को दोबारा शुरू करने का फैसला किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नासिक संयंत्र का लक्ष्य वर्ष 2028-29 तक भारतीय वायुसेना को करीब 12 नए लड़ाकू विमान उपलब्ध कराना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में करीब 29 सक्रिय लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि उसकी स्वीकृत क्षमता 42 स्क्वाड्रन की है।
2019 में बना था आखिरी सुखोई
नासिक स्थित एचएएल संयंत्र का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों से मुख्य रूप से विमानों की मरम्मत और रखरखाव के काम के लिए किया जा रहा था। इस संयंत्र में भारतीय वायुसेना के लिए आखिरी बार 2019 में सुखोई-30 लड़ाकू विमान तैयार किए गए थे।
नासिक संयंत्र ने भारतीय वायुसेना के लिए कुल 222 सुखोई लड़ाकू विमान तैयार किए थे। वर्ष 2019-20 में पुराने उत्पादन आदेश के पूरा होने के बाद यहां सुखोई का निर्माण बंद हो गया था। इसके बाद संयंत्र में विमानों की मरम्मत के साथ-साथ हल्के लड़ाकू विमान (LCA) के लिए एक नई उत्पादन लाइन तैयार करने का काम शुरू किया गया।
अतिरिक्त सुखोई विमानों के आदेश के बाद लिया गया फैसला
सुखोई उत्पादन लाइन को फिर से शुरू करने का फैसला दिसंबर 2024 में अतिरिक्त लड़ाकू विमानों के लिए दिए गए आदेश के बाद आया है। इन विमानों का उद्देश्य अभियानों और दुर्घटनाओं में नष्ट हुए सुखोई विमानों की कमी को पूरा करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, नए सुखोई विमानों के निर्माण में करीब 50 प्रतिशत स्वदेशी कलपुर्जों और तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। नासिक संयंत्र से तैयार होने वाला पहला नया सुखोई विमान 2027-28 में भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की उम्मीद है।
मौजूदा सुखोई बेड़े का भी होगा आधुनिकीकरण
नासिक संयंत्र का काम केवल नए सुखोई विमानों के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। यहां भारतीय वायुसेना के मौजूदा सुखोई-30 एमकेआई बेड़े के आधुनिकीकरण पर भी काम किया जाएगा।
इस आधुनिकीकरण परियोजना की अनुमानित लागत करीब 60,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भी इस महत्वपूर्ण उन्नयन कार्यक्रम का हिस्सा होगा।
आधुनिकीकरण के तहत सुखोई विमानों की क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न नई प्रणालियों और उपकरणों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी इस कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कलपुर्जों के निर्माण में शामिल किया जाएगा।
वायुसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
भारतीय वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमी और स्वीकृत स्क्वाड्रन क्षमता से कम संख्या में लड़ाकू स्क्वाड्रन के कारण चुनौती का सामना कर रही है। ऐसे में नासिक में सुखोई उत्पादन लाइन को दोबारा सक्रिय करना वायुसेना के लड़ाकू बेड़े को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
नए सुखोई विमानों के निर्माण के साथ मौजूदा विमानों के आधुनिकीकरण से भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने और पुराने पड़ रहे लड़ाकू बेड़े की क्षमताओं को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।