चंडीगढ़ 24 फरवरी 2026( जगदीश कुमार) चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा संचालित डॉग शेल्टर में गंभीर लापरवाही और पशु क्रूरता का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक गर्भवती आवारा कुतिया को नियमों के विपरीत लगभग 60 दिनों तक अवैध रूप से पिंजरे में बंद रखा गया। इसी दौरान उसने एक पिल्ले को खा लिया और दूसरे को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया, जो घटना सामने आने तक जीवित था।यह घटना शाम करीब 5 बजे प्रकाश में आई। पशु अधिकार कार्यकर्ता और मुख्य शिकायतकर्ता सार्थक जैन ने सबसे पहले इस मामले को आधिकारिक रूप से उठाया। उनके हस्तक्षेप के बाद करीब 15 पशु कल्याण स्वयंसेवक शेल्टर पहुंचे, जिससे नगर निगम अधिकारियों के साथ लगभग पांच घंटे तक टकराव की स्थिति बनी रही।नियमों के अनुसार, नगर निगम के डॉग शेल्टर में किसी भी कुत्ते को अधिकतम तीन दिन तक ही रखा जा सकता है। लेकिन विवाद के केंद्र में रही मादा कुतिया को करीब 60 दिनों तक कैद रखा गया, जो निर्धारित अवधि से लगभग बीस गुना अधिक है। इसी दौरान वह गर्भवती हुई और उसने पिंजरे के भीतर ही पिल्लों को जन्म दिया।सार्थक जैन और अन्य स्वयंसेवकों का आरोप है कि अत्यधिक तनाव, पर्याप्त भोजन की कमी, निगरानी में लापरवाही और लंबे समय तक बंदी बनाए रखने की अमानवीय परिस्थितियों ने कुतिया को गंभीर मानसिक और शारीरिक पीड़ा में धकेल दिया। उनका कहना है कि इसी वजह से उसने पहले एक पिल्ले को खा लिया और दूसरे को भी नुकसान पहुंचाया।
स्वयंसेवकों ने शेल्टर की देखरेख के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी डॉ. गौरव को इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि पुलिस और स्वयंसेवकों द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद वे मौके पर नहीं पहुंचे। मामले ने शहर में पशु कल्याण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।