नई दिल्ली 24 फरवरी 2026 ( दैनिक खबरनामा ) नई दिल्ली: National Capital Region Transport Corporation (NCRTC) द्वारा प्रस्तावित दिल्ली–पानीपत–करनाल नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। दिल्ली के सराय काले खां से हरियाणा के करनाल (मधुबन बाईपास) तक जाने वाला यह कॉरिडोर करीब 136.3 किलोमीटर लंबा होगा और नेशनल हाईवे-44 के समानांतर विकसित किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 35 हजार करोड़ रुपये आंकी जा रही है।इस कॉरिडोर में दिल्ली में पांच स्टेशन—सराय काले खां, इंद्रप्रस्थ, कश्मीरी गेट, बुराड़ी, मुकुंदपुर और नरेला—जबकि हरियाणा में कुंडली, सोनीपत, समालखा, मुरथल, गन्नौर, पानीपत और करनाल में स्टेशन प्रस्तावित हैं। केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में इस परियोजना के लिए फंड को मंजूरी दी थी। हरियाणा सरकार की भागीदारी के साथ एशियन डेवलपमेंट बैंक और जापान की वित्तीय एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा सकता है।कॉरिडोर के निर्माण का काम जून-जुलाई 2026 तक शुरू होने की संभावना है। NCRTC ने नरेला से सोनीपत के बीच बिजली लाइनों और अन्य बाधाओं को हटाने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
इस रैपिड रेल कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली से करनाल की यात्रा, जो अभी सड़क मार्ग से साढ़े तीन से चार घंटे लेती है, घटकर करीब डेढ़ घंटे में सिमट जाएगी। वहीं दिल्ली से पानीपत की दूरी महज 60 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे NCR के शहरों में हाईस्पीड कनेक्टिविटी बढ़ेगी और राजधानी पर आवासीय दबाव भी कम होने की उम्मीद है।परियोजना में देरी की प्रमुख वजहों में रूट एलाइनमेंट और स्टेशनों के चयन को लेकर केंद्र व राज्य सरकारों के बीच लंबी चर्चा, फंडिंग मॉडल पर सहमति और National Highways Authority of India (NHAI) के साथ समन्वय शामिल रहे। अब हाईवे चौड़ीकरण का काम अंतिम चरण में है, जिससे रैपिड रेल के निर्माण को गति मिलने की संभावना है।दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के बाद यह प्रोजेक्ट दिल्ली-NCR में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नया आयाम देने वाला साबित हो सकता है