दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 13 जून:  पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, भिंबर और चकौटी समेत कई क्षेत्रों में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तानी सेना और पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।

संवैधानिक और मानवीय अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चला रही ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर पाकिस्तान सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। संगठन के नेताओं पर इनाम घोषित किए गए हैं और कई क्षेत्रों में इंटरनेट व मोबाइल सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं।

इन घटनाक्रमों के बीच जम्मू-कश्मीर की मुख्यधारा की राजनीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। कश्मीर में सक्रिय राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से PoK के मौजूदा हालात और वहां के नागरिकों के अधिकारों को लेकर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं आने पर कई लोग नाराजगी जता रहे हैं।

राजनीतिक दलों का लंबे समय से यह रुख रहा है कि नियंत्रण रेखा (LoC) के आर-पार लोगों की आवाजाही बहाल होनी चाहिए और दोनों हिस्सों के बीच संपर्क बढ़ना चाहिए। हालांकि आलोचकों का कहना है कि PoK में लोकतांत्रिक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा नहीं की गई।

कश्मीर मामलों के जानकारों का मानना है कि JAAC का आंदोलन महंगाई, प्रशासनिक विफलताओं और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों से शुरू हुआ था, लेकिन समय के साथ यह पाकिस्तान के प्रभाव और नियंत्रण के खिलाफ स्थानीय असंतोष का बड़ा मंच बन गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, PoK की राजनीतिक व्यवस्था में मौजूद कुछ संरचनात्मक प्रावधानों को लेकर भी लंबे समय से असंतोष है। आंदोलनकारी समूहों का आरोप है कि इन व्यवस्थाओं के जरिए पाकिस्तान क्षेत्र की राजनीति और सत्ता संरचना पर प्रभाव बनाए रखता है।

कश्मीर मामलों के विश्लेषकों का कहना है कि PoK में चल रहे घटनाक्रम ने वहां की राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। साथ ही, जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया को लेकर भी बहस तेज हो गई है कि क्या उन्हें वहां के नागरिकों के अधिकारों और लोकतांत्रिक मुद्दों पर अधिक स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

PoK में जारी अशांति और विरोध प्रदर्शनों के बीच क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, जबकि स्थानीय लोगों की मांग है कि उनके संवैधानिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए।

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