चंडीगढ़ 28 फरवरी 2026( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ के Postgraduate Institute of Medical Education and Research (पीजीआई) के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि शिशुओं के मस्तिष्क विकास में विटामिन बी12 की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह शोध प्रतिष्ठित Pediatric Neurology जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसने बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई चिंताएं और संभावनाएं दोनों उजागर की हैं।अध्ययन के दौरान विटामिन बी12 की कमी से ग्रस्त 141 शिशुओं का एमआरआई स्कैन और मानकीकृत विकासात्मक परीक्षणों के माध्यम से मूल्यांकन किया गया। परिणामों में पाया गया कि बी12 की कमी के कारण बच्चों में विकास में देरी, सुस्ती, एनीमिया, विकासात्मक माइलस्टोन का खोना तथा गंभीर मामलों में त्वचा का काला पड़ना और बालों का हल्का होना जैसे लक्षण दिखाई दिए। लगभग 60 प्रतिशत शिशुओं में मस्तिष्क के आयतन में कमी और सिर की वृद्धि प्रभावित पाई गई।शोधकर्ताओं ने बताया कि समय पर उपचार मिलने के बाद अधिकांश बच्चों में सतर्कता और विकास की गति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हस्तक्षेप देर से किया जाए तो सीखने की क्षमता, बुद्धि स्तर और व्यवहार पर दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में व्यापक शाकाहार की प्रवृत्ति के कारण विटामिन बी12 की कमी एक बड़ी पोषण संबंधी चुनौती बनी हुई है। केवल स्तनपान करने वाले शिशु, विशेषकर उन माताओं के जिनमें स्वयं बी12 की कमी है, अधिक जोखिम में होते हैं। यदि छह माह के बाद भी मां में यह कमी बनी रहती है तो शिशु के मस्तिष्क विकास पर गंभीर असर पड़ सकता है।अध्ययन ने स्पष्ट किया है कि विटामिन बी12 की कमी मानसिक विकास में बाधा का एक ऐसा कारण है, जिसे समय रहते पहचाना और रोका जा सकता है।
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