पंजाब 29 जनवरी 2026 (दैनिक खबरनामा) पंजाब के मोहाली में जिला भाषा कार्यालय, एस.ए.एस. नगर में पुआधी पंजाबी सथ, मोहाली के सहयोग से शोध-पुस्तक ‘पुआध: खालसा पंथ की जन्मभूमि’ पर विचार-चर्चा का आयोजन किया गया। इस पुस्तक का संपादन मनमोहन सिंह दाऊं और डॉ. मुख्तियार सिंह द्वारा किया गया है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरदार जसवंत सिंह ज़फ़र, निदेशक, भाषा विभाग, पंजाब उपस्थित हुए, जबकि डॉ. गुरबचन सिंह मावी, पूर्व प्रोफेसर, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना विशेष अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध आलोचक डॉ. देविंदर सिंह बोहा ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत भाषा विभाग, पंजाब की विभागीय धुन ‘धनु लेखारी नानका’ से हुई। डॉ. दर्शन कौर, शोध अधिकारी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए पुस्तक की विशिष्ट संपादन शैली और पुआध क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पुआध को सिख इतिहास के एक केंद्रीय अध्याय के रूप में स्थापित करती है।मुख्य अतिथि सरदार जसवंत सिंह ज़फ़र ने पुस्तक को पुआध क्षेत्र के ऐतिहासिक तथ्यों से भरपूर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। उन्होंने संपादक मनमोहन सिंह दाऊं को पुआध पर 22 वर्षों के शोध कार्य के लिए बधाई दी और अपनी कविताएं ‘गुरधानी’ तथा ‘चमकौर दी गढ़ी’ भी श्रोताओं के साथ साझा कीं।अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. देविंदर सिंह बोहा ने पुस्तक की सुंदर संपादना के साथ-साथ सिख इतिहास के कई महत्वपूर्ण और रचनात्मक पहलुओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिबानों ने मानवता और मानवीय धर्म की रक्षा के लिए लोक आंदोलन की नींव रखी।विशेष अतिथि डॉ. गुरबचन सिंह मावी ने ऐतिहासिक दृष्टिकोण से कहा कि यह पुस्तक पुआध को केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि उस धरती के रूप में प्रस्तुत करती है जहां से सिख धर्म को नई धार्मिक और सामाजिक दिशा मिली।डॉ.परमजीत सिंह ने शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए पुस्तक के कई अनदेखे और महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज हम मूल दर्शन को छोड़कर केवल घटनाओं पर केंद्रित हो गए हैं। डॉ. सिमरजीत कौर ने इस पुस्तक को सिख विरासत की अमूल्य धरोहर बताया।
डॉ. राजिंदर सिंह कुराली ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने बेगमपुरा की अवधारणा को व्यावहारिक रूप दिया। श्री हरबंस सिंह सोढ़ी ने कहा कि पुआध की धरती का हर स्थान खालसाई चेतना से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर ज्ञानी स्वर्ण सिंह ढंगराली के ढाढी जत्थे ने वंदना और वार के गायन से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।पुस्तक के संपादक मनमोहन सिंह दाऊं ने शोध और संपादन प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी तथा पुस्तक में शामिल कुछ कविताएं भी प्रस्तुत कीं।कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को सम्मानित किया गया और धन्यवाद ज्ञापित किया गया। मंच संचालन प्रो. गुरमीत सिंह खरड़ ने किया। इस अवसर पर जिला भाषा कार्यालय की ओर से पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, अधिकारियों और छात्रों सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

भारत तो आए, लेकिन JNU नहीं जा सके थे वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का दिल्ली से खास जुड़ाव

नई दिल्ली 8 जनवरी (दैनिक खबरनामा)वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का भारत…
Share to :

बजरंग सेना राजस्थान में संगठन विस्तार, राकेश कुमार मीणा प्रदेश महामंत्री मनोनीत

राजस्थान 6 जनवरी (दैनिक खबरनामा)बजरंग सेना संगठन को राजस्थान में और अधिक…
Share to :

कन्नौज जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर सड़क सुरक्षा प्रचार वाहन को किया रवाना, मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत दिए गए दिशा-निर्देश

उत्तर प्रदेश 2 जनवरी(दैनिक खबरनामा )कन्नौज में सड़क सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता…
Share to :

बिसौली में नए ईंट भट्ठे का शुभारंभ, विधायक आशुतोष मौर्य ने फीता काटकर किया उद्घाटन

उत्तर प्रदेश 2 जनवरी (दैनिक खबरनामा)बदायूँ जनपद की बिसौली विधानसभा क्षेत्र में…
Share to :