महाराष्ट्र 15 जनवरी (दैनिक खबरनामा) महाराष्ट्र नागपुर
10 फरवरी 1985 को महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मे एक नवजात शिशु को जन्म के महज तीन दिन बाद उसकी मां ने सामाजिक दबाव के चलते छोड़ दिया। आधिकारिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक, बच्चे की मां 21 वर्षीय अविवाहित युवती थीं, जिन्होंने समाज के डर से नागपुर स्थित MSS (अनाथ बच्चों और पीड़ित महिलाओं के लिए संचालित संस्था) में बच्चे को सौंप दिया।करीब एक महीने तक यह बच्चा अनाथालय में रहा। इसी दौरान MSS की एक नर्स ने हिंदू कैलेंडर के अनुसार फरवरी महीने को ‘फाल्गुन’ मानते हुए बच्चे का नाम फाल्गुन रखा। कुछ ही हफ्तों बाद फाल्गुन को मुंबई लाया गया, जहां घूमने आए एक डच दंपती ने उसे गोद लेने का निर्णय लिया।कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद डच दंपती फाल्गुन को अपने साथ नीदरलैंड ले गए। इस तरह नागपुर में जन्मा यह बच्चा अनाथालय से होते हुए एक विदेशी परिवार का हिस्सा बना और उसे नई पहचान व भविष्य मिला।
यह कहानी न सिर्फ सामाजिक परिस्थितियों की जटिलताओं को दर्शाती है, बल्कि गोद लेने की प्रक्रिया के जरिए मिले नए जीवन के अवसरों की मिसाल भी पेश करती है।

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