असम 19 जनवरी (दैनिक खबरनामा) असम अब विकास और वन्यजीव संरक्षण का एक अनूठा मॉडल बनने की ओर बढ़ रहा
है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने असम दौरे के दौरान काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर (कालीबोर–नुमालीगढ़) की आधारशिला रखी। इस परियोजना के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि देश में सड़क निर्माण और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं।करीब 6,957 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाईटेक एलिवेटेड हाईवे असम की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा। यह परियोजना 85.67 किलोमीटर लंबी होगी और राष्ट्रीय राजमार्ग-715 का हिस्सा बनेगी,जो कालीबोर से नुमालीगढ़ तक फैली होगी। इस कॉरिडोर के पूरा होने से जहां यातायात सुगम होगा, वहीं हाथी, गैंडे, हिरण समेत अन्य वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवागमन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वर्तमान में यह सड़क दो लेन की है और कई स्थानों पर इसकी चौड़ाई व डिजाइन सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है। विशेषकर बरसात के मौसम में, जब काजीरंगा नेशनल पार्क से वन्यजीव बाहर निकलते हैं, तब हाईवे पार करते समय दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एलिवेटेड कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है, ताकि वाहन ऊपर से गुजरें और वन्यजीव नीचे बिना किसी बाधा के सुरक्षित निकल सकें।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शिलान्यास किए गए इस प्रोजेक्ट को इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संतुलन का ऐतिहासिक उदाहरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर न सिर्फ असम की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को गति देगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर सतत विकास और वन्यजीव संरक्षण का अग्रणी उदाहरण भी बनाएगा।