पंजाब 4 जनवरी ( दैनिक खबरनामा )राज्य पर बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच पंजाब सरकार वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही (जनवरी–मार्च) में ₹12,006 करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने अपनी उधारी योजना भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भेज दी है। यह राशि खुले बाजार से राज्य प्रतिभूतियों (स्टेट सिक्योरिटीज) की बिक्री के जरिए जुटाई जाएगी।सरकार के उधारी कैलेंडर के अनुसार, जनवरी में ₹3,000 करोड़, फरवरी में ₹4,000 करोड़ और मार्च में ₹5,006 करोड़ जुटाए जाएंगे। इस तिमाही में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल ₹4.99 लाख करोड़ की रिकॉर्ड उधारी प्रस्तावित है, जिसमें पंजाब की हिस्सेदारी लगभग 2.4% है।वर्तमान वित्त वर्ष के बजट अनुमानों में पंजाब सरकार ने कुल ₹34,201 करोड़ की शुद्ध उधारी का अनुमान लगाया था, जिसमें से शेष राशि पहले ही तीन तिमाहियों में जुटाई जा चुकी है। हालांकि यह उधारी केंद्र सरकार और RBI द्वारा तय सीमा के भीतर है, लेकिन नकदी संकट से जूझ रहे राज्य पर बढ़ता कर्ज चिंता का विषय बना हुआ है।बजट अनुमान 2025-26 के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक राज्य का बकाया कर्ज बढ़कर ₹4.17 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹3.82 लाख करोड़ की तुलना में करीब 9% अधिक है। 46% के कर्ज-जीएसडीपी अनुपात के साथ पंजाब देश के सबसे अधिक कर्जदार राज्यों में शामिल है।एक और गंभीर चिंता यह है कि सरकार द्वारा लिया गया बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने—यानी मूलधन और ब्याज के भुगतान—और अन्य खर्चों में जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कर्ज सेवा पर कुल ₹43,194 करोड़ खर्च होने का अनुमान है, जिसमें ₹24,995 करोड़ ब्याज भुगतान और ₹18,199 करोड़ मूलधन की अदायगी शामिल है। यह राशि वर्ष की अनुमानित शुद्ध उधारी से भी अधिक है।एक अर्थशास्त्री ने पिछले साल बजट पेश होने के बाद इस अख़बार से कहा था, “सरकार अपनी मौजूदा खर्च आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त राजस्व नहीं जुटा पा रही है। इस घाटे की भरपाई कर्ज के जरिए की जा रही है।”