चंडीगढ़ 3 फरवरी 2026( जगदीश कुमार) चंडीगढ़ के चर्चित सोनू शाह हत्याकांड में पुलिस जांच एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इस मामले का प्रमुख चश्मदीद गवाह जोगिंदर सिंह पिछले कई वर्षों से लापता है और हैरानी की बात यह है कि पुलिस के पास यह तक पुख्ता जानकारी नहीं है कि वह जिंदा है या उसकी मौत हो चुकी है।करीब सात साल पहले बुड़ैल में राजवीर सिंह उर्फ सोनू शाह की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वारदात के वक्त मौके पर मौजूद जोगिंदर सिंह और परमिंदर सिंह भी हमले में घायल हुए थे। बाद में परमिंदर सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जबकि जोगिंदर सिंह तब से रहस्यमय तरीके से गायब है।सोनू शाह के भाई प्रवीण शाह ने अदालत में दावा किया कि जोगिंदर सिंह की भी मौत हो चुकी है, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में इस दावे की कोई पुष्टि नहीं है। न तो कोई डेथ सर्टिफिकेट मिला है और न ही जोगिंदर के परिजनों को उसकी मौत की आधिकारिक जानकारी है।जांच के दौरान पुलिस ने जोगिंदर की पत्नी सुनीता से पूछताछ की। सुनीता ने बताया कि वह पिछले 12–13 वर्षों से अपने पति से अलग रह रही है और उसे भी उसके जीवित या मृत होने की कोई जानकारी नहीं है। पुलिस ने हरियाणा के जींद जिले में उसके पैतृक गांव में भी जांच की, जहां भतीजे सुनील ने बताया कि जोगिंदर करीब तीन साल पहले गांव आया था। उस समय वह बीमार था, इलाज के बाद बिना किसी को बताए वहां से चला गया। उसके पास न तो आधार कार्ड था और न ही कोई सक्रिय संपर्क नंबर, जिससे उसकी तलाश और मुश्किल हो गई।पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सोनू शाह की हत्या गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इशारे पर करवाई गई थी। इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई के अलावा धर्मेंद्र, शुभम उर्फ बिगनी, मंजीत उर्फ राहुल मोटा, अभिषेक उर्फ बंटी, राजू बसोदी, राजन उर्फ जाट और दीपक रंगा को भी आरोपी बनाया गया है।मुख्य गवाह के लापता होने और उसकी स्थिति को लेकर स्पष्टता न होने से न सिर्फ जांच की दिशा पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि पूरे मामले की न्यायिक प्रक्रिया पर भी गंभीर असर पड़ता दिख रहा है।
You May Also Like
सीधी | 29 दिसंबर | अमित मिश्रा सीधी जिले के मझौली क्षेत्र अंतर्गत पांढ, ताला एवं मझौली धान खरीदी केंद्रों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जबकि जिला कलेक्टर सीधी द्वारा उपार्जन केंद्रों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के सख्त निर्देश दिए गए हैं और कई स्थानों पर कार्रवाई भी की जा चुकी है, इसके बावजूद कुछ प्रभारी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मझौली खरीदी केंद्र स्थित पांढ व ताला क्षेत्र का है, जहां उपार्जन केंद्र प्रभारी नियमों को ताक पर रखकर धान खरीदी कर रहे हैं। स्थानीय किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी को न तो किसी अधिकारी का डर है और न ही किसी कार्रवाई की परवाह। पूर्व में अधिकारियों द्वारा खरीदी केंद्र का निरीक्षण भी किया गया था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि निर्धारित 41 किलो की जगह 41 किलो 200 ग्राम तक धान भरवाया जा रहा है। इतना ही नहीं, नियमों के विपरीत धान की तौल और बोरा भराई का कार्य किसान स्वयं करने को मजबूर हैं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि अतिरिक्त धान भरवाने से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है, लेकिन मजबूरी में वे इस व्यवस्था को सहन कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि कलेक्टर के सख्त निर्देशों और पूर्व निरीक्षण के बावजूद आखिर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषी उपार्जन केंद्र प्रभारियों पर कब सख्त कार्रवाई करता है।
- Vishal
- December 29, 2025
वसीयत के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट
- Vishal
- January 16, 2026