दैनिक खबरनामा । लेह, 22 जून : लद्दाख के लेह में आयोजित 30वीं सिंधु दर्शन यात्रा इस वर्ष प्रथम ‘सिंधु कुंभ’ के रूप में विश्वस्तरीय पहचान बना रही है। भारत की सभ्यतागत विरासत, राष्ट्रीय एकता, आध्यात्मिक परंपराओं और वैश्विक सद्भाव के इस महाउत्सव में देश-विदेश से आए लगभग 2800 श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं। मंगलवार को सिंधु घाट पर 156 देशों से संकलित पवित्र जल का सिंधु नदी में ऐतिहासिक जलाभिषेक किया जाएगा, जिसे विश्व-इतिहास की एक अनूठी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहल माना जा रहा है।
सोमवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामले एवं जन वितरण राज्य मंत्री निमूबेन जयंतीभाई बमभानिया लेह पहुंचीं। उनके साथ विभिन्न देशों से आए अतिथियों और श्रद्धालुओं का कुशाक बकुल रिनपोछे एयरपोर्ट पर पारंपरिक तिलक, खटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ भव्य स्वागत किया गया।
भारत माता के जयघोष से गूंजा सिंधु भवन
शाम को लेह स्थित सिंधु भवन में तिरंगा लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं का ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। लद्दाख के विभिन्न धार्मिक संगठनों, सामाजिक प्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने देश-विदेश से आए मेहमानों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर लद्दाखी कलाकारों सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए सांस्कृतिक दलों ने रंगारंग प्रस्तुतियां देकर माहौल को भक्तिमय और देशभक्ति से सराबोर कर दिया।
उपराज्यपाल करेंगे मुख्य समारोह का उद्घाटन
मंगलवार को सिंधु घाट पर आयोजित मुख्य समारोह का उद्घाटन लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना करेंगे। कार्यक्रम के दौरान 156 देशों से लाए गए पवित्र जल को महिलाओं की कलश यात्रा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सिंधु नदी में अर्पित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार यह अनुष्ठान भारतीय दर्शन के मूल सिद्धांत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का वैश्विक संदेश देगा तथा विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बीच शांति, सौहार्द, पारस्परिक सम्मान और साझा मानवीय मूल्यों को मजबूत करेगा। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के नेतृत्व में किया जा रहा है।
सांस्कृतिक विविधता का भी होगा भव्य प्रदर्शन
सिंधु घाट पर तिरंगा फहराने के साथ संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से देश के विभिन्न राज्यों की लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले दल विशेष प्रस्तुतियां देंगे। इस अवसर पर देश-विदेश के कई गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहेंगे।
आठ देशों के राजदूतों की मौजूदगी बनी विशेष आकर्षण
30वीं सिंधु दर्शन यात्रा की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक आठ देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों की सहभागिता है, जो इस आयोजन के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय महत्व और वैश्विक सांस्कृतिक सहयोग का प्रतीक मानी जा रही है।
यात्रा में फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी, मॉरीशस की शीलाबाई बाप्पू, श्रीलंका की महिषिणी कोलोने, दक्षिण अफ्रीका के प्रो. अनिल सूकलाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो के चंद्रदाथ सिंह, इक्वाडोर के राजदूत फर्नांडो बुचेली वर्गास, चिली के जुआन रोलांडो एंगुलो मोन्साल्वे तथा आयरलैंड के केविन केली अपनी पत्नी सहित भाग ले रहे हैं।
सिंधु घाट पर 156 देशों के जलाभिषेक के साथ शुरू हुआ यह ऐतिहासिक आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है, बल्कि विश्व बंधुत्व और वैश्विक एकता का भी सशक्त संदेश दे रहा है।