दैनिक ख़बरनामा चंडीगढ़। 28 मई : चंडीगढ़ शहर की पहचान और लाइफलाइन मानी जाने वाली सुखना लेक की बिगड़ती हालत को लेकर आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने मंगलवार से लेक में जमी गाद निकालने का अभियान शुरू कर दिया। रेगुलेटरी एंड क्षेत्र में मशीनें और ट्रक लगाकर बड़े स्तर पर सफाई कार्य किया जा रहा है। करीब दो दशक बाद सुखना लेक से इस तरह गाद निकाली जा रही है।
जानकारी के अनुसार इससे पहले वर्ष 2003 में बड़े स्तर पर गाद हटाने का काम हुआ था, तब यह अभियान श्रमदान के जरिए चलाया गया था। इस बार प्रशासन ने एक निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मानसून आने से पहले अधिक से अधिक गाद हटाई जा सके।
लेक के रेगुलेटरी एंड की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है। यहां पानी की कमी के कारण जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी थीं। लंबे समय से इस हिस्से में गाद जमा होने के बावजूद सफाई कार्य शुरू नहीं हो पाया था, लेकिन अब वेटलैंड अथॉरिटी से मंजूरी मिलने के बाद काम तेजी से शुरू कर दिया गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक झील की तलहटी में कई फीट तक गाद जमा हो चुकी है, जिससे पानी संग्रहण क्षमता करीब 30 से 40 प्रतिशत तक घट गई है। यही कारण है कि बारिश के दौरान झील जल्दी भर जाती है और फ्लड गेट खोलने की नौबत आ जाती है।
आईआईटी रुड़की की एक स्टडी के अनुसार गर्मी और वाष्पीकरण के चलते सुखना लेक का जलस्तर प्रतिदिन करीब ढाई मिलीमीटर तक घट जाता है। पिछले मानसून में कई बार जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने पर फ्लड गेट खोलने पड़े थे। वहीं बीते छह महीनों में लेक का जलस्तर सात से आठ फीट तक नीचे जा चुका है।
गौरतलब है कि सुखना लेक का निर्माण वर्ष 1958 में शिवालिक पहाड़ियों से आने वाले पानी को रोकने और शहर के पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। अब प्रशासन का दावा है कि मानसून शुरू होने से पहले गाद निकालने का काम तेज गति से पूरा किया जाएगा, ताकि लेक की जल क्षमता को फिर से बेहतर बनाया जा सके।