दैनिक खबरनामा | 5 अगस्त 2026
बीजिंग: अमेरिका की ओर से लगाए गए नए व्यापारिक प्रतिबंधों और अतिरिक्त टैरिफ के जवाब में चीन ने कड़ा आर्थिक और व्यापारिक कदम उठाया है। बीजिंग ने छह अमेरिकी कंपनियों को अपनी प्रतिबंधित सूची (ब्लैकलिस्ट) में शामिल कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका को ड्रोन, उनके महत्वपूर्ण पुर्जों और संबंधित तकनीक के निर्यात संबंधी नियमों को और अधिक सख्त करने का फैसला किया गया है।
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए लगाए गए नए प्रतिबंधों और व्यापारिक उपायों से चीन के वैध आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा है। मंत्रालय के अनुसार, इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए जवाबी कार्रवाई करना आवश्यक हो गया था।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अब अमेरिका को ड्रोन और उनसे जुड़ी संवेदनशील तकनीकों के निर्यात पर पहले से अधिक निगरानी और नियंत्रण रखा जाएगा। चीन का कहना है कि यह निर्णय उसके राष्ट्रीय हितों और व्यापारिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
छह अमेरिकी कंपनियां प्रतिबंधित सूची में
चीन ने जिन छह अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है, उनमें भू-विज्ञान अनुसंधान और जैव-प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। बीजिंग का आरोप है कि इन कंपनियों ने शिनजियांग से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों का समर्थन किया और ऐसी गतिविधियों में भाग लिया जिन्हें चीन अपने हितों के खिलाफ मानता है।
इन प्रतिबंधों के लागू होने के बाद चीन के नागरिकों, सरकारी संस्थानों और अन्य संगठनों को इन कंपनियों के साथ व्यापार, निवेश, सहयोग या किसी भी प्रकार की कारोबारी गतिविधि करने की अनुमति नहीं होगी।
टैरिफ विवाद से बढ़ा व्यापारिक तनाव
चीन की यह कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका ने चीन सहित कई देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। बीजिंग का आरोप है कि अमेरिका व्यापार घाटे का हवाला देकर एकतरफा और अनुचित फैसले ले रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
उइगर मुद्दे पर भी आमने-सामने
चीनी सरकार का कहना है कि प्रतिबंधित की गई अमेरिकी कंपनियां शिनजियांग से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू कराने में सहयोग कर रही थीं। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठनों ने पहले भी शिनजियांग में उइगर मुस्लिम समुदाय के कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, चीन लगातार इन आरोपों को खारिज करता आया है।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक और रणनीतिक तनाव के बीच उठाए गए इन नए कदमों का असर वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।