दैनिक खबरनामा 25 मई 2026 : भारत हमेशा से एक कृषि प्रधान देश रहा है और देश में हमेशा से खेती की पैदावार बढ़ाने को लेकर नए साधन और संसाधन का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
भारत में पैदावार बढ़ाने के लिए इफको ने नैनो यूरिया और नैनो डीपी को सफलतापूर्वक लांच किया। अब इसी कड़ी में एक विदेशी कंपनी B+H Solution GmbH का नाम भी जुड़ने जा रहा जो धातु आधारित नैनो तकनीक को भारत में ले कर आ रहे है
1. मुख्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण (नैनो तकनीक)
यह तकनीक पारंपरिक खादों (जैसे यूरिया या डीएपी) से बिल्कुल अलग है:
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धातुओं का उपयोग: इसमें चांदी (Silver) और तांबे (Copper) के अत्यंत सूक्ष्म नैनोकणों (Nanoparticles) का इस्तेमाल किया जाता है।
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दोहरा फायदा: यह तकनीक सिर्फ पौधों को पोषण ही नहीं देती, बल्कि एक ‘प्लांट प्रोटेक्शन’ (पौध संरक्षण) की तरह भी काम करती है। तांबा और चांदी प्राकृतिक रूप से फंगस और बैक्टीरिया रोधी (Anti-microbial) होते हैं, जिससे फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
2. भारत में निवेश और विस्तार (वर्ष 2026)
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निवेश का लक्ष्य: कंपनी वर्ष 2026 में करीब 10 लाख यूरो (लगभग 9-10 करोड़ रुपये) का निवेश करने जा रही है।
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स्थानीय उपस्थिति: कंपनी भारत में अपनी सहयोगी इकाई ‘डॉ. हेनीश एग्री सॉल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (शुरुआत 2022) के जरिए काम कर रही है।
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सरकारी मंजूरी: कंपनी को भारत सरकार के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) के तहत आवश्यक पंजीकरण (Registration) मिल चुका है, जिसका मतलब है कि ये उत्पाद भारतीय मानकों पर सुरक्षित और स्वीकृत हैं।
3. भारतीय किसानों और बाजार पर प्रभाव
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लागत में कमी और बेहतर उत्पादन: नैनो तकनीक के कारण इन उर्वरकों की बहुत कम मात्रा की आवश्यकता होती है। इससे परिवहन और भंडारण का खर्च बचता है।
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पर्यावरण के अनुकूल: पारंपरिक उर्वरकों का एक बड़ा हिस्सा मिट्टी या पानी में बहकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। इसके विपरीत, नैनो कण सीधे पौधों द्वारा सोख लिए जाते हैं, जिससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है।
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मौजूदा उत्पाद: कंपनी का ‘एग्रोबीज’ (Agrobiogen) जैसे उत्पाद पहले से ही भारतीय मिट्टी और जलवायु के अनुकूल तैयार किए गए हैं, जो किसानों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं।