दैनिक ख़बरनामा । चंडीगढ़ 27 मई: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए एक पुराने संपत्ति विवाद में पुलिस की असामान्य सक्रियता पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी को प्रारंभिक जांच करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला कनाडा में रह रहे सरबजीत सिंह गिल की याचिका से जुड़ा है। याचिका में उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें जांच में आभासी माध्यम से शामिल होने की अनुमति दी जाए, क्योंकि वह पहले भी जांच में सहयोग कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने विदेश यात्रा पर लगी रोक हटाने की मांग भी की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि विवाद सेक्टर-2 स्थित एक संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों को लेकर है, जिनका निष्पादन कई दशक पहले हुआ था। याचिकाकर्ता के अनुसार वह अपनी बीमार मां से मिलने फरवरी में भारत आए थे। मां के निधन के बाद अंतिम संस्कार और धार्मिक कार्यक्रम के दौरान ही पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी।
याचिका में कहा गया कि आर्थिक अपराध शाखा ने उनकी मां और बहन के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। गिल का आरोप है कि उन्होंने कई बार जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर सहयोग किया, इसके बावजूद उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे से विदेश जाने से रोक दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि यह विवाद पहले से दीवानी अदालतों में लंबित रहा है और संबंधित कानूनी कार्यवाही पहले ही खारिज हो चुकी थी। इसके बावजूद पुलिस ने मामले में अत्यधिक तत्परता दिखाई।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने टिप्पणी की कि शहर में अन्य गंभीर घटनाएं होने के बावजूद पुलिस एक पुराने दीवानी विवाद में असामान्य रूप से सक्रिय दिखाई दे रही है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में दुर्भावना की आशंका जताई और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताई।
इसके बाद अदालत ने केंद्रीय जांच एजेंसी को निर्देश दिया कि वह सभी संबंधित पक्षों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को निर्धारित की गई है।