दैनिक खबरनामा रांची। 28 मई : इबोला वायरस को लेकर दुनिया के कई देशों में बढ़ती चिंता के बीच झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। राजधानी रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर अब विशेष निगरानी और अलग रखने की व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि विदेश से आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच प्रभावी ढंग से की जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन, हवाई अड्डा प्रबंधन और प्रमुख अस्पतालों के साथ मिलकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों के अनुसार हवाई अड्डे पर चौबीसों घंटे एक विशेष एंबुलेंस तैनात रहेगी। यदि किसी यात्री में तेज बुखार, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी या रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत अलग रखकर प्राथमिक जांच की जाएगी।
जांच के बाद जरूरत पड़ने पर ऐसे यात्रियों को रिम्स अथवा सदर अस्पताल भेजा जाएगा, जहां विशेष निगरानी में उपचार की व्यवस्था रहेगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में कर्मचारियों और चिकित्सा कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
सदर अस्पताल में अलग वार्ड तैयार
संभावित संक्रमण से निपटने के लिए सदर अस्पताल में चार बिस्तरों वाला विशेष पृथक वार्ड तैयार किया गया है। यहां संक्रमण रोकने वाले उपकरण, सुरक्षा पोशाक, स्वच्छता व्यवस्था और अलग चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। चिकित्सा कर्मियों को भी संक्रमण से बचाव और संदिग्ध मरीजों की देखभाल के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार रिम्स में भी संक्रामक रोगों को लेकर निगरानी व्यवस्था को सक्रिय कर दिया गया है। अस्पताल प्रशासन को हर स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
हवाई अड्डे पर जांच होगी सख्त
स्वास्थ्य विभाग ने विदेश से आने वाले यात्रियों की जांच प्रक्रिया को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। यात्रियों की यात्रा संबंधी जानकारी, स्वास्थ्य स्थिति और संभावित लक्षणों पर विशेष नजर रखी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संदिग्ध व्यक्तियों के नमूनों की जांच भी कराई जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि राज्य में फिलहाल इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर पूरी तैयारी रखी जा रही है।
क्या है इबोला संक्रमण
इबोला एक गंभीर विषाणु जनित बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलती है। इस बीमारी में तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, उल्टी, दस्त और गंभीर स्थिति में रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मृत्यु दर भी काफी अधिक मानी जाती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि फल खाने वाले चमगादड़ इस विषाणु के प्राकृतिक वाहक हो सकते हैं।
बचाव को लेकर लोगों से अपील
चिकित्सकों ने लोगों से स्वच्छता बनाए रखने, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचने और किसी भी संदिग्ध लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग ने अफवाहों से दूर रहने और किसी भी संदिग्ध स्थिति की जानकारी तुरंत प्रशासन को देने की अपील की है।