दैनिक खबरनामा चंडीगढ़ 26 मई 2026 : विश्व थायराइड दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को थायराइड संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूक रहने और समय पर जांच करवाने की सलाह दी। विशेषज्ञों का कहना है कि थायराइड विकारों की शुरुआती पहचान और उपचार से दीर्घकालिक जटिलताओं से बचाव संभव है।
एंडोक्रिनोलॉजिस्ट सलाहकार, लिवासा अस्पताल, डॉ. आकांक्षा गौतम ने बताया कि थायरॉइड ग्लैंड शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर, हृदय की कार्यप्रणाली, शरीर के तापमान, मूड और हार्मोनल संतुलन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि हाइपोथायरायडिज्म, हाइपरथायरायडिज्म, थायराइड नोड्यूल्स और ऑटोइम्यून थायराइड रोग जैसी समस्याएं यदि लंबे समय तक बिना उपचार के छोड़ दी जाएं, तो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि कई लोग थायराइड के शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इनमें बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ना या घटना, लगातार थकान, बाल झड़ना, अनियमित मासिक धर्म, चिंता, नींद की समस्या, गर्दन में सूजन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसे संकेत शामिल हैं। डॉ. गौतम के अनुसार, इन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि समय पर थायराइड जांच से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।
डॉ. आकांक्षा गौतम ने विशेष रूप से महिलाओं को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था, प्रसवोत्तर अवस्था और रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं में थायराइड असंतुलन का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा मधुमेह, मोटापा, ऑटोइम्यून विकार या थायराइड रोग का पारिवारिक इतिहास रखने वाले लोगों को नियमित हार्मोनल जांच और थायराइड प्रोफाइल टेस्ट करवाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन, पर्याप्त नींद और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचने की सलाह दी। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे इंटरनेट या सोशल मीडिया पर उपलब्ध अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें।
विश्व थायराइड दिवस का उद्देश्य लोगों में थायराइड संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समय रहते जांच एवं उपचार के महत्व को समझाना है।