दैनिक खबरनामा | नई दिल्ली, 30 मई : देशभर में लड़कियों की पढ़ाई और देर से विवाह को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई राज्यों में कम उम्र में शादी की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। हाल ही में जारी राष्ट्रीय सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे अधिक लड़कियों की शादी कानूनी उम्र पूरी होने से पहले कर दी जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश में महिलाओं की शादी की औसत उम्र पहले के मुकाबले बढ़ी है और बड़ी संख्या में महिलाएं अब इक्कीस वर्ष की आयु के बाद विवाह कर रही हैं। इसके बावजूद कुछ राज्यों में आज भी कम उम्र में विवाह की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में विवाह करने वाली कुल महिलाओं में से बड़ी संख्या ऐसी रही जिनकी शादी इक्कीस वर्ष से पहले हो गई। इनमें कुछ लड़कियों की उम्र अठारह वर्ष से भी कम थी। सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति महिलाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक है।
रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल को सबसे अधिक प्रभावित राज्य बताया गया है, जहां कम उम्र में विवाह होने के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए गए। इसके बाद झारखंड का स्थान रहा। छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी कम उम्र में होने की बात सामने आई है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की तुलना में गांवों में यह समस्या अधिक देखने को मिली। हालांकि सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पश्चिम बंगाल के शहरों में भी कम उम्र में विवाह के मामले देश में सबसे अधिक पाए गए। यह आंकड़े शहरी क्षेत्रों के राष्ट्रीय औसत से कई गुना ज्यादा बताए गए हैं।
दूसरी ओर देश की राजधानी दिल्ली और केरल ने इस मामले में बेहतर उदाहरण पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में कम उम्र में विवाह का कोई मामला सामने नहीं आया, जबकि केरल में ऐसे मामलों की संख्या बेहद कम दर्ज की गई। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी स्थिति काफी बेहतर बताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में विवाह होने से लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है और कम उम्र में मातृत्व के कारण स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं। सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सख्त प्रशासनिक कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।