दैनिक खबरनामा | श्रीनगर, 30 मई : जम्मू-कश्मीर कांग्रेस में आंतरिक असहमति एक बार फिर खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश इकाई के नेतृत्व की कार्यशैली तथा सत्तारूढ़ सहयोगी दल के साथ जारी राजनीतिक साझेदारी को लेकर चिंता व्यक्त की है। इस घटनाक्रम ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को नई चर्चा दे दी है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र भेजकर जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ नेताओं, वर्तमान एवं पूर्व विधायकों की संयुक्त बैठक बुलाने की मांग की है। पत्र में संभावित पंचायत और नगर निकाय चुनावों को देखते हुए संगठन की स्थिति, रणनीति और गतिविधियों की समीक्षा करने का आग्रह भी किया गया है।
हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वकार रसूल वानी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जिन लोगों की राजनीतिक सोच कांग्रेस की मूल विचारधारा से मेल नहीं खाती, उनके कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने अतीत में दिए गए कुछ राजनीतिक सुझावों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस की नीतियों और सिद्धांतों के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता आवश्यक है।
वानी ने प्रदेश की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी के साथ कांग्रेस के गठबंधन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विधानसभा चुनावों से पहले किया गया यह राजनीतिक निर्णय अपेक्षित लाभ नहीं दे सका और कई अवसरों पर कांग्रेस को राजनीतिक असहजता का सामना करना पड़ा।
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि संगठन लगातार जनता के मुद्दों को मजबूती से उठा रहा है और पार्टी की राजनीतिक पहचान तथा नीतियों से कोई समझौता नहीं किया गया है।
प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला ने भी संगठनात्मक अनुशासन पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी मतभेद पर पार्टी मंचों के भीतर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य के विभिन्न जनहित मुद्दों पर सक्रियता से आवाज उठा रही है और संगठन को कमजोर करने वाली बयानबाजी से बचना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर उभर रहे ये मतभेद पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक एकजुटता के लिए महत्वपूर्ण चुनौती साबित हो सकते हैं।