दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 3 जून 2026: पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की है कि राज्य के निजी शिक्षण संस्थान अब एक शैक्षणिक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इस निर्णय को कानूनी रूप देने के लिए सरकार जल्द ही अध्यादेश लाएगी, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर कानून बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही फीस को लेकर अभिभावकों में लंबे समय से असंतोष था। बढ़ती शैक्षणिक लागत के कारण अनेक परिवार आर्थिक दबाव का सामना कर रहे थे। जनभावनाओं और अभिभावकों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फीस वृद्धि को नियंत्रित करने का यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 5 प्रतिशत की सीमा केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों से वसूले जाने वाले अन्य अनिवार्य शुल्क भी इसके दायरे में शामिल होंगे। इससे निजी स्कूल किसी अन्य मद के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर नियमों को दरकिनार नहीं कर सकेंगे।
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि पिछले तीन वर्षों में 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने वाले निजी स्कूलों को अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को लौटानी होगी। इसके लिए सरकार जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि अभिभावकों के हितों की पूरी तरह रक्षा हो।
मुख्यमंत्री मान ने इस फैसले को हाल ही में अमृतसर में सामने आए एक दुखद मामले से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक मेधावी छात्रा द्वारा कथित रूप से स्कूल में प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। इसके बाद सरकार ने निजी शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली और फीस संरचना की व्यापक समीक्षा शुरू की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा किसी भी परिवार की मूल आवश्यकता है और इसे केवल व्यावसायिक लाभ का साधन नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और संतुलन सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठाती रहेगी।