कंपनियां अब अपने वार्षिक सीएसआर बजट का 10 प्रतिशत तक सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से निवेश कर सकेंगी

दैनिक खबरनामा ब्यूरो | नई दिल्ली 30 मई : केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए कंपनियों को सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अधिक प्रभावी सामाजिक निवेश का रास्ता प्रदान किया है। नए प्रावधानों के तहत कंपनियां अपने वार्षिक सीएसआर व्यय का अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध गैर-लाभकारी संस्थाओं द्वारा जारी विशेष वित्तीय साधनों में लगा सकेंगी।
कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा जारी संशोधित नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे सामाजिक क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओं को धन जुटाने के नए अवसर मिलेंगे और सामाजिक परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बढ़ेगी।
सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज, शेयर बाजार का एक विशेष मंच है, जहां सामाजिक उद्देश्यों के लिए कार्यरत संस्थाएं पारदर्शी और विनियमित व्यवस्था के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक विकास परियोजनाओं को बाजार आधारित वित्तीय तंत्र से जोड़ना है।
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई कंपनी इस माध्यम से सीएसआर निवेश करती है, तो उसे उन परियोजनाओं के लिए अलग से प्रभाव मूल्यांकन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे प्रक्रिया सरल होने के साथ-साथ प्रशासनिक लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज को सक्रिय बनाने में मददगार साबित हो सकता है। अब तक ऐसे मंचों को पर्याप्त निवेशकों का सहयोग नहीं मिल पा रहा था, जिससे इनके विस्तार की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।
वित्तीय और स्थिरता क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, नए प्रावधानों से कंपनियां अपने सामाजिक निवेश को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और परिणाम-केंद्रित तरीके से संचालित कर सकेंगी। इससे पर्यावरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुशासन से जुड़े लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह व्यवस्था सामाजिक परियोजनाओं के लिए धन के स्रोतों का विस्तार करेगी तथा सामाजिक उद्यमों को व्यापक निवेशक आधार तक पहुंचने का अवसर प्रदान करेगी। इससे सामाजिक विकास कार्यक्रमों की निगरानी, जवाबदेही और प्रभावशीलता में भी सुधार आने की संभावना है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 के दौरान देश की कंपनियों ने सीएसआर गतिविधियों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए थे। नए नियमों के लागू होने के बाद इस राशि का एक हिस्सा अब सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से विकास परियोजनाओं तक पहुंच सकेगा।

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