ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और प्रदूषण घटाने पर सरकार का जोर, भारी वाहनों के लिए नई तकनीक पर भी काम जारी

दैनिक खबरनामा ब्यूरो | नई दिल्ली, 30 मई : देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने और परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार डीजल में जैव-आधारित ईंधन के मिश्रण को अनिवार्य बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार इस संबंध में वर्ष के अंत तक नई व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है।

सड़क परिवहन क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, डीजल में वैकल्पिक ईंधन के मिश्रण को लेकर व्यापक स्तर पर अनुसंधान और परीक्षण किए जा रहे हैं। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक बताए जा रहे हैं, जिसके आधार पर नीति निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल की तुलना में डीजल की खपत देश में कहीं अधिक है। ऐसे में यदि डीजल में जैव-ईंधन का मिश्रण लागू होता है, तो इसका प्रभाव ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के रूप में अधिक दिखाई दे सकता है।

इसके साथ ही सरकार विद्युत चालित भारी वाणिज्यिक वाहनों की चुनौतियों को दूर करने के लिए भी नई तकनीकी व्यवस्था पर काम कर रही है। प्रस्तावित मॉडल के तहत केवल बैटरी बदलने के बजाय ट्रक के अग्रभाग को बदलने की व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे लंबी दूरी के परिवहन में समय और परिचालन लागत कम हो सके।

उद्योग जगत से जुड़े एक हालिया अध्ययन में बताया गया है कि पिछले एक दशक के दौरान बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर किए गए निवेश का सकारात्मक असर देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे अर्थव्यवस्था को हर वर्ष बड़े स्तर पर बचत हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैकल्पिक ईंधन, विद्युत परिवहन और आधुनिक लॉजिस्टिक्स ढांचे पर केंद्रित नीतियां भारत को अधिक टिकाऊ, स्वच्छ और आत्मनिर्भर परिवहन प्रणाली की ओर ले जा सकती हैं।

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