किरायों में बढ़ोतरी के बावजूद यात्रा मांग मजबूत, आने वाले महीनों में उड़ानों की संख्या में सीमित कटौती की तैयारी
दैनिक खबरनामा ब्यूरो | नई दिल्ली, 30 मई : देश की प्रमुख विमानन कंपनी को वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में घाटे का सामना करना पड़ा है। कंपनी के अनुसार, विदेशी मुद्रा विनिमय दर में प्रतिकूल बदलाव, ईंधन की बढ़ी हुई लागत और श्रम संबंधी नए नियमों के अनुपालन के लिए किए गए विशेष प्रावधान का वित्तीय परिणामों पर असर पड़ा है।
हालांकि कंपनी का कहना है कि हवाई यात्रा की मांग अब भी मजबूत बनी हुई है और किरायों में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद यात्रियों की संख्या पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं देखा गया है। प्रबंधन का मानना है कि यात्रा की बढ़ती आवश्यकता के कारण यात्री उच्च किराया चुकाने के लिए भी तैयार हैं।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बाद विमान ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखा गया, जिससे विमानन कंपनियों की परिचालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए कई मार्गों पर किरायों में संशोधन किया गया है।
कंपनी ने बताया कि घरेलू उड़ानों में बढ़ी हुई लागत का अधिकांश हिस्सा किरायों के माध्यम से समायोजित किया जा सका है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण रही है। इससे विदेशी परिचालन पर दबाव बढ़ा है।
वित्तीय वर्ष के दौरान कंपनी की आय में वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन बढ़ती लागत और विशेष प्रावधानों के कारण लाभप्रदता प्रभावित हुई। प्रबंधन का कहना है कि मांग और लागत के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए परिचालन रणनीति में कुछ बदलाव किए जाएंगे।
आगामी महीनों में अपेक्षाकृत कमजोर मांग वाले मौसम को देखते हुए कंपनी कुछ मार्गों पर क्षमता का पुनर्गठन करेगी। इसके तहत अल्पकालिक पट्टे पर लिए गए कुछ विमानों और अधिक परिचालन लागत वाले पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से बेड़े से हटाने की योजना है।
हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि नए विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया जारी रहेगी और दीर्घकालिक विस्तार योजनाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि लागत नियंत्रण और क्षमता प्रबंधन के ये कदम विमानन क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों के बीच कंपनियों की वित्तीय स्थिति को स्थिर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।