दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 31 मई: देश के वस्त्र और परिधान क्षेत्र को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने विदेशी कपास के आयात पर लगने वाले शुल्क को अस्थायी रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कदम से उद्योग जगत को बेहतर गुणवत्ता वाली कपास कम लागत पर उपलब्ध हो सकेगी, जिससे उत्पादन खर्च में कमी आने की संभावना है।
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह व्यवस्था 1 जून 2026 से 31 अक्तूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि में विदेशों से आने वाली कपास पर सीमा शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर से भी छूट प्रदान की गई है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि देश में कपास की उपलब्धता बढ़ाने और वस्त्र उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। उद्योग लंबे समय से आयात पर लगने वाले शुल्क में राहत की मांग कर रहा था। सरकार का मानना है कि इस फैसले से सूत, कपड़ा और परिधान निर्माण से जुड़े उद्यमों को लाभ मिलेगा तथा उत्पादन लागत घटने से उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है।
हालांकि इस निर्णय के बाद किसानों की आय पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि शुल्क में दी गई छूट सीमित अवधि के लिए है और इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि घरेलू कपास उत्पादकों के हितों को नुकसान न पहुंचे। सरकार का कहना है कि उद्योग की मांग और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर गुणवत्ता वाली कपास की उपलब्धता बढ़ने से देश के वस्त्र उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों को इसका लाभ मिल सकता है, क्योंकि उन्हें कच्चे माल की उपलब्धता में आसानी होगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश का वस्त्र क्षेत्र करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराता है। ऐसे में कपास की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने वाला यह कदम पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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