दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़ 31 मई:  आम, मीठी टॉफी, चॉकलेट और अन्य आकर्षक स्वादों वाले इलेक्ट्रॉनिक धूम्रपान उपकरण युवाओं और किशोरों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन उत्पादों को सुरक्षित समझने की भूल गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर चिंता व्यक्त की।
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में उपलब्ध हजारों प्रकार के स्वाद युवाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से तैयार किए जाते हैं। इन स्वादों के कारण निकोटिन जैसी नशे की लत पैदा करने वाली सामग्री का प्रभाव आसानी से छिप जाता है, जिससे कम उम्र के लोग भी इसकी ओर खिंचे चले आते हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि इन उपकरणों में मौजूद द्रव को गर्म करने पर बनने वाले सूक्ष्म कण सीधे श्वसन तंत्र तक पहुंचते हैं। इनमें निकोटिन के अलावा कई हानिकारक रसायन और धात्विक तत्व भी पाए जा सकते हैं, जो लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
युवाओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा किए गए विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि ऐसे उत्पादों का नियमित उपयोग करने वालों में श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी, रक्तचाप से जुड़ी समस्याएं और हृदय रोगों की आशंका भी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि किशोरावस्था में निकोटिन का सेवन मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है। इससे एकाग्रता, सीखने की क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है, जिसमें तनाव, अवसाद और व्यवहार में बदलाव जैसी समस्याएं शामिल हैं।

पहचानना आसान नहीं
चिकित्सकों के अनुसार आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक धूम्रपान उपकरण आकार में इतने छोटे होते हैं कि वे सामान्य लेखनी, स्मृति संचय यंत्र या अन्य छोटे उपकरणों जैसे दिखाई देते हैं। यही कारण है कि अभिभावकों के लिए इन्हें पहचानना कई बार मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि किसी किशोर में बार-बार प्यास लगना, गले में लगातार परेशानी, चिड़चिड़ापन, ध्यान में कमी या व्यवहार में अचानक बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो अभिभावकों को सतर्क रहना चाहिए।

प्रतिबंध के बाद भी बनी हुई है चुनौती
देश में इलेक्ट्रॉनिक धूम्रपान उत्पादों के निर्माण, बिक्री, भंडारण और प्रचार-प्रसार पर प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद विभिन्न माध्यमों से इनकी उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं और अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है।

उनका कहना है कि आकर्षक स्वाद और आधुनिक दिखावे के पीछे छिपे स्वास्थ्य जोखिमों को समझना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी को नशे की लत और उससे होने वाले दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।

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