दैनिक खबरनामा | जम्मू, 1 जून : जम्मू-कश्मीर में सिजेरियन (सी-सेक्शन) प्रसव के बढ़ते मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी और निजी अस्पतालों में सामान्य प्रसव की तुलना में सीजेरियन डिलीवरी का अनुपात लगातार बढ़ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब 51 प्रतिशत प्रसव सी-सेक्शन के जरिए हो रहे हैं, जबकि NFHS-5 में यह आंकड़ा 41.7 प्रतिशत था। यानी पांच वर्षों में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सिजेरियन प्रसव के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। शहरी क्षेत्रों में 68.9 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 47.1 प्रतिशत प्रसव सी-सेक्शन से हो रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में भी सिजेरियन प्रसव का चलन बढ़ा है। NFHS-5 में जहां सरकारी अस्पतालों में 42.7 प्रतिशत प्रसव सी-सेक्शन से होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 48.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है। निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां करीब 90 प्रतिशत प्रसव सिजेरियन के माध्यम से हो रहे हैं। शहरी निजी स्वास्थ्य संस्थानों में यह आंकड़ा 92.5 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों के निजी अस्पतालों में 88.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
गौरतलब है कि सरकार पहले ही सी-सेक्शन के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त कर चुकी है और इसके पीछे के कारणों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव का बढ़ा रुझान
रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक पहलू भी सामने आए हैं। जम्मू-कश्मीर में अब अधिकांश महिलाएं घर पर प्रसव कराने के बजाय स्वास्थ्य संस्थानों को प्राथमिकता दे रही हैं। NFHS-6 के अनुसार प्रदेश में 93.6 प्रतिशत प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हुए, जिनमें शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 97.3 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 92.8 प्रतिशत रहा।
पिछले सर्वेक्षण में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 92.4 था। हालांकि सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या में कुछ कमी आई है। पहले 86.8 प्रतिशत प्रसव सरकारी संस्थानों में होते थे, जो अब घटकर 80.3 प्रतिशत रह गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 94.8 प्रतिशत महिलाओं को प्रसव के दौरान प्रशिक्षित और कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता मिली, जिसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।