दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 4 जून 2026: भारत की वायु रक्षा क्षमता को नई मजबूती देते हुए रूस ने अत्याधुनिक S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी स्क्वाड्रन भारत को सौंप दी है। रक्षा सूत्रों के अनुसार यह खेप समुद्री मार्ग से भारत पहुंची है और जल्द ही इसे एक रणनीतिक क्षेत्र में तैनात किया जाएगा। वहीं, पांचवीं और अंतिम स्क्वाड्रन के भी अगले कुछ महीनों में भारत पहुंचने की संभावना है।
2018 में हुआ था 5 अरब डॉलर का ऐतिहासिक समझौता
भारत और रूस के बीच अक्टूबर 2018 में लगभग 5 अरब डॉलर की लागत से S-400 प्रणाली की खरीद का समझौता हुआ था। इस सौदे के तहत भारत को कुल पांच स्क्वाड्रन मिलनी हैं। इनमें से तीन स्क्वाड्रन पहले ही भारतीय वायुसेना को मिल चुकी हैं, जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण शेष दो की आपूर्ति में देरी हुई थी।
अब चौथी स्क्वाड्रन की डिलीवरी शुरू हो चुकी है और पांचवीं स्क्वाड्रन के नवंबर तक भारत पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
सीमाओं पर सुरक्षा कवच बना S-400
भारत ने पहले प्राप्त तीन S-400 स्क्वाड्रन को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तैनात किया है। इनमें पंजाब-जम्मू सेक्टर, राजस्थान-गुजरात क्षेत्र और सिक्किम सेक्टर शामिल हैं। इन तैनातियों ने पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर भारत की वायु सुरक्षा को काफी मजबूत किया है।
कितनी ताकतवर है S-400 प्रणाली?
S-400 दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों में से एक मानी जाती है।
एक स्क्वाड्रन में आमतौर पर 8 से 12 मोबाइल लॉन्चर होते हैं।
प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल ट्यूब लगी होती हैं।
एक समय में लगभग 48 मिसाइलें लॉन्च के लिए तैयार रहती हैं।
रीलोडिंग और सपोर्ट वाहनों के साथ यह क्षमता 128 मिसाइलों तक पहुंच सकती है।
यह प्रणाली 600 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य का पता लगाने में सक्षम है।
लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को विभिन्न दूरी और ऊंचाई पर नष्ट कर सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर में भी निभाई थी अहम भूमिका
रक्षा सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्ष हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 प्रणाली ने भारतीय वायु रक्षा को मजबूती प्रदान की थी। इस दौरान इसने दुश्मन की हवाई गतिविधियों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत खरीदेगा पांच और S-400
S-400 की प्रभावशीलता को देखते हुए रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रूस से पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे भारत की बहुस्तरीय वायु सुरक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत होगी।
स्वदेशी ‘प्रोजेक्ट कुशा’ पर भी तेजी से काम
भारत लंबे समय तक विदेशी प्रणालियों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसी उद्देश्य से ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के तहत स्वदेशी लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली विकसित की जा रही है।
इस परियोजना का लक्ष्य ऐसी स्वदेशी प्रणाली तैयार करना है जो S-400 की तरह दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों को विभिन्न दूरी पर मार गिराने में सक्षम हो। इससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को भी बड़ा बल मिलेगा।
निष्कर्ष
रूस से S-400 की चौथी स्क्वाड्रन की प्राप्ति भारत की वायु सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सीमाओं पर बढ़ती चुनौतियों के बीच यह प्रणाली देश के लिए एक मजबूत ‘रक्षा कवच’ साबित हो रही है। वहीं, अतिरिक्त S-400 की खरीद और स्वदेशी ‘प्रोजेक्ट कुशा’ भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य के लिए और अधिक सशक्त बनाएंगे।