दैनिक खबरनामा|ब्यूरो.नई दिल्ली. 5 जून 2026 रुपये की गिरावट और विदेशी पूंजी की निकासी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। सरकार ने शुक्रवार को आयकर अधिनियम में बदलाव करते हुए एक अध्यादेश जारी किया। इसके तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII को अब सरकारी प्रतिभूतियों, G-Sec में निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर LTCG नहीं देना होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस छूट का मकसद भारतीय बॉन्ड बाजार को ग्लोबल निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाना है। सरकारी बॉन्ड लंबी अवधि के साधन होते हैं, इसलिए टैक्स हटाकर सरकार स्थिर और टिकाऊ विदेशी पूंजी को भारत लाना चाहती है।
इससे पहले FII को इक्विटी और डेट से होने वाले लॉन्ग टर्म गेन पर 12.5% LTCG टैक्स चुकाना पड़ता था। यह दर जुलाई 2024 के बजट में 10% से बढ़ाकर 12.5% की गई थी। अब सिर्फ सरकारी बॉन्ड पर यह पूरी तरह खत्म कर दी गई है।
यह कदम ऐसे वक्त आया है जब भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे हैं। इसकी वजह से शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, बढ़ता व्यापार घाटा और डॉलर की मांग ने रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचा दिया। स्थिति संभालने के लिए RBI को विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर बाजार में दखल देना पड़ा, जिससे रिजर्व में भी कमी आई।
रुपये को स्थिरता देने के लिए RBI ने पहले ही कई लॉन्ग टर्म सरकारी बॉन्ड को ‘फुली एक्सेसिबल रूट’ के तहत खोल दिया था, ताकि विदेशी निवेश बिना रोक-टोक आ सकें।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि LTCG छूट से FII का नेट रिटर्न बढ़ेगा। इससे सरकारी बॉन्ड में उनकी हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है। नतीजतन देश में डॉलर की आवक तेज होगी, वित्तीय बाजारों में लिक्विडिटी सुधरेगी और सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर व विकास योजनाओं के लिए पैसा जुटाने में आसानी होगी।
कुल मिलाकर सरकार का यह नीतिगत बदलाव भारतीय वित्तीय बाजारों को वैश्विक मंच पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे निवेशकों का भरोसा लौटने और लॉन्ग टर्म विदेशी निवेश को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।