दैनिक खबरनामा | मुंबई, 1 जून : देश में ब्याज दरों के बदलते माहौल के बीच बैंक जमाओं (डिपॉजिट्स) के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हालिया आंकड़ों से संकेत मिलता है कि अब बड़ी संख्या में जमाकर्ता अपने पैसे को लंबी अवधि के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश करना पसंद कर रहे हैं, जबकि कम अवधि वाली जमाओं का आकर्षण घटा है।

7% से कम ब्याज वाली जमाओं का बढ़ा दायरा

बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज दरों में कटौती के बाद 7 प्रतिशत से कम ब्याज देने वाली सावधि जमाओं का हिस्सा तेजी से बढ़ा है। इससे स्पष्ट है कि बैंक अपनी देनदारियों की लागत को नए ब्याज दर चक्र के अनुरूप समायोजित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार घटती नीतिगत दरों का प्रभाव अब बैंकिंग प्रणाली में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

लंबी अवधि की एफडी की ओर बढ़ा रुझान

जमाकर्ताओं ने बेहतर और स्थिर रिटर्न सुनिश्चित करने के लिए लंबी अवधि वाली सावधि जमाओं को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। एक वर्ष तक की अवधि वाली जमाओं का हिस्सा घटा है, जबकि एक से तीन वर्ष की अवधि वाली एफडी का हिस्सा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में ब्याज दरों में और बदलाव की आशंका को देखते हुए लोग मौजूदा दरों को लंबे समय के लिए सुरक्षित करना चाह रहे हैं।

कुल जमाओं में बढ़ी एफडी की हिस्सेदारी

पिछले कुछ वर्षों में बैंकों की कुल जमाओं में सावधि जमाओं का हिस्सा लगातार बढ़ा है। दूसरी ओर बचत खातों (सेविंग्स अकाउंट) में रखी जाने वाली राशि का अनुपात घटा है। यह दर्शाता है कि ग्राहक अब बेहतर रिटर्न के लिए अपनी बचत को एफडी जैसे साधनों में स्थानांतरित कर रहे हैं।

जमा वृद्धि में आया सुधार

बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि की रफ्तार में भी सुधार दर्ज किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने नई जमा राशि जुटाने में प्रमुख योगदान दिया है, जबकि निजी क्षेत्र के बैंक भी मजबूत हिस्सेदारी बनाए हुए हैं।

परिवार अब भी सबसे बड़े जमाकर्ता

घरेलू परिवार बैंक जमाओं के सबसे बड़े स्रोत बने हुए हैं। कुल जमा राशि में उनकी हिस्सेदारी सबसे अधिक है। हालांकि गैर-वित्तीय संस्थाओं और वित्तीय कंपनियों की भागीदारी में भी धीरे-धीरे वृद्धि देखने को मिल रही है, जिससे जमा आधार अधिक विविध बन रहा है।

बड़े डिपॉजिट्स का दबदबा कायम

आंकड़े बताते हैं कि बड़ी राशि वाली एफडी बैंकिंग प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। करोड़ों रुपये के डिपॉजिट्स का कुल सावधि जमाओं में बड़ा हिस्सा बना हुआ है। वहीं छोटे मूल्य की जमाओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम रही है।

वरिष्ठ नागरिकों का योगदान स्थिर

वरिष्ठ नागरिकों की जमा राशि का हिस्सा पिछले कुछ वर्षों से लगभग स्थिर बना हुआ है। बैंकों द्वारा इस वर्ग को अतिरिक्त ब्याज दरों का लाभ दिए जाने के बावजूद उनकी हिस्सेदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है।

क्या कहते हैं संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि जमाकर्ताओं का लंबी अवधि की एफडी की ओर झुकाव यह दर्शाता है कि वे भविष्य में ब्याज दरों में संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए अभी की दरों को सुरक्षित करना चाहते हैं। यदि ब्याज दरों में नरमी का दौर जारी रहता है, तो आने वाले समय में यह प्रवृत्ति और मजबूत हो सकती है।

बैंकिंग क्षेत्र में हो रहे ये बदलाव न केवल जमाकर्ताओं की सोच को दर्शाते हैं, बल्कि देश की बदलती आर्थिक और मौद्रिक परिस्थितियों की भी तस्वीर पेश करते हैं।

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