दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 8 जून 2026: जम्मू-कश्मीर में ठेकेदारों के लंबित भुगतानों के कारण विकास परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है। जम्मू-कश्मीर कॉन्ट्रैक्टर्स कोऑर्डिनेशन कमेटी (JKCCC) के अनुसार, विभिन्न विभागों के तहत किए गए कार्यों के बदले ठेकेदारों के करीब 1,650 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान अभी तक जारी नहीं किए गए हैं, जिससे निर्माण और रखरखाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कमेटी के अध्यक्ष गुलाम जिलानी पुर्जा ने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत कार्य करने वाले ठेकेदारों के लगभग 1,500 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग (आर एंड बी) के करीब 72 करोड़ रुपये तथा मैकडमाइजेशन (सड़क निर्माण एवं मरम्मत) से जुड़े लगभग 80 करोड़ रुपये के भुगतान भी लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि ठेकेदारों ने कठिन परिस्थितियों में भी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का प्रयास किया, लेकिन वैध भुगतान न मिलने से वे गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं। पिछले दो वर्षों में कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
सड़कों की बदहाली से लोगों में बढ़ा आक्रोश
भुगतान संकट का असर अब आम लोगों पर भी दिखाई देने लगा है। श्रीनगर के पुराने शहर के कई इलाकों, जिनमें हब्बाकदल, मंदिर बाग, गौऊ कदम और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं, वहां सड़कें जर्जर हालत में हैं। ठेकेदारों और प्रशासन के बीच जारी गतिरोध के कारण मरम्मत और रखरखाव कार्य ठप पड़े हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में नाराजगी बढ़ रही है।
नई टेंडर नीति भी नहीं बढ़ा सकी काम की रफ्तार
सरकार ने सभी सरकारी ठेकों के लिए ई-टेंडरिंग व्यवस्था अनिवार्य कर दी है और कार्यों के विभाजन पर भी रोक लगा दी है। हालांकि, दर संशोधन और भुगतान संबंधी विवादों के चलते विकास कार्यों की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है।
मैकडमाइजेशन परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी होने के बावजूद ठेकेदारों की सीमित भागीदारी चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के समय पर पूरा होने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही लंबित भुगतानों का निपटारा नहीं हुआ तो जम्मू-कश्मीर में विकास कार्यों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।