चंडीगढ़ | रिपोर्ट: जगदीश कुमार चंडीगढ़ में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। वर्ष 2025 में अब तक साइबर सेल को 8,495 साइबर ठगी की शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि इनमें से केवल 150 मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई। यानी हजारों पीड़ितों की शिकायतें बिना मुकदमा दर्ज हुए ही फाइलों में सिमट गईं।विशेषज्ञों का मानना है कि एफआईआर दर्ज न होने से न सिर्फ पीड़ितों को न्याय से वंचित होना पड़ रहा है, बल्कि ठगी गई रकम की रिकवरी भी लगभग नामुमकिन हो जाती है।13 राज्यों में 93 छापे, फिर भी मास्टरमाइंड बेनकाब नहींसाइबर ठगी की जांच में पुलिस ने देश के 13 राज्यों में 93 छापेमारी की और 150 एफआईआर दर्ज कीं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी भी बड़े सरगना को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। कार्रवाई के दौरान अधिकतर वही लोग पकड़े गए, जिन्होंने ठगों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। जांच में सामने आया कि इन अकाउंट होल्डरों को ठगी की रकम का महज 10 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था, जबकि असली ठग पर्दे के पीछे रहकर पूरा नेटवर्क चला रहे थे।पीड़ित अपने ही पैसे के लिए भटकने को मजबूरठगी के बाद जब बैंक खाते फ्रीज किए जाते हैं, तो पीड़ितों को अपनी ही रकम वापस पाने के लिए साइबर सेल, बैंक और जिला अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई मामलों में लोग सालों तक संघर्ष करने के बावजूद एक-एक रुपये के लिए तरसते रहे।
सवालों के घेरे में सिस्टमसाइबर अपराध के बढ़ते मामलों और कमजोर कार्रवाई ने पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सरगना तक पहुंचकर नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाता, तब तक साइबर ठगी पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।