दैनिक खबरनामा 19 अप्रैल 2026 शिमला में रविवार को केंद्रीय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस और आईएनडीआई गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों से महिला आरक्षण की बात करने वाली कांग्रेस ने कभी इसे लागू करने का साहस नहीं दिखाया। जबकि भाजपा सरकार द्वारा ठोस समाधान पेश किए जाने पर विपक्ष ने बहानों और तकनीकी मुद्दों का सहारा लेकर प्रक्रिया को रोकने का प्रयास किया, जो महिलाओं के अधिकारों के साथ विश्वासघात है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सरकार गरीब, महिला, युवा और किसान को केंद्र में रखकर काम करेगी। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहा है और पिछले एक दशक में इसमें अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने लाल किले से शौचालय निर्माण के आह्वान को क्रांतिकारी सोच बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षा को राष्ट्रीय विमर्श में जगह मिली। उज्ज्वला योजना के जरिए करोड़ों महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ।नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा अपने संगठन में पहले ही महिलाओं को 33 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधित्व दे चुकी है, जबकि कांग्रेस अपने संगठन में भी इसे लागू नहीं कर पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में महिलाओं को अवसर के बजाय परिवारवाद के आधार पर सीमित स्थान मिलता है, जबकि भाजपा में योग्यता के आधार पर महिलाओं को आगे बढ़ाया जाता है।वहीं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सरोज पांडे ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं को लंबे समय तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने प्रियंका गांधी के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों की सबसे बड़ी लड़ाई के समय यह नारा कहीं नजर नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में बिल गिरने के बाद विपक्ष का रवैया महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है और यह देश की महिलाओं का अपमान है।