दैनिक खबरनामा। जसवां परागपुर (कांगड़ा), 13 जून: हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय निकाय लेखा परीक्षा समिति की समीक्षा में करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ियां उजागर होने के बाद सरकार ने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों से राशि दंडात्मक ब्याज सहित वसूलने के निर्देश जारी किए हैं।
विधानसभा की स्थानीय निकाय लेखा परीक्षा समिति की समीक्षा के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक पंचायती राज संस्थाओं में कुल 50.68 करोड़ रुपये की राशि वसूली योग्य पाई गई। हालांकि अब तक केवल 2.09 करोड़ रुपये की ही वसूली अथवा समायोजन हो सका है, जबकि 48.58 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अभी भी लंबित है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के स्तर पर सरकारी धन के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं, उनसे पूरी राशि दंडात्मक ब्याज सहित वसूली जाएगी। साथ ही संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) को चेतावनी दी गई है कि वसूली प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बरतने पर उनके खिलाफ विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मंडी और सिरमौर में सबसे ज्यादा राशि लंबित
पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न जिलों में ऑडिट आपत्तियों से संबंधित करोड़ों रुपये की राशि अभी भी लंबित है। इनमें मंडी जिला सबसे ऊपर है, जहां 21.68 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूली के लिए लंबित है। इसके बाद सिरमौर में 11.65 करोड़ रुपये, कांगड़ा में 4.96 करोड़ रुपये, हमीरपुर में 3.96 करोड़ रुपये और चंबा में 2.09 करोड़ रुपये की राशि फंसी हुई है।
इसके अलावा शिमला में 1.26 करोड़ रुपये, सोलन में 1.07 करोड़ रुपये, कुल्लू में 87.31 लाख रुपये, ऊना में 56.87 लाख रुपये, बिलासपुर में 20.78 लाख रुपये, लाहौल-स्पीति में 13.36 लाख रुपये तथा किन्नौर में 9.45 लाख रुपये की राशि लंबित बताई गई है।
पंचायती राज विभाग की अतिरिक्त निदेशक एवं सचिव नीलम दुल्टा द्वारा जारी आदेशों की पुष्टि जिला पंचायत अधिकारी कांगड़ा सचिन ठाकुर ने की है। सरकार का कहना है कि पंचायतों में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने और सरकारी धन के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए वसूली अभियान को तेज किया जाएगा।