दैनिक खबरनामा। शिमला, 15 जून : हिमाचल प्रदेश में भूकंप, बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और वनाग्नि जैसी संभावित आपदाओं से निपटने के लिए सोमवार को आयोजित राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल के दौरान आपदा प्रबंधन तंत्र की कई कमियां सामने आईं। अभ्यास के दौरान कई स्थानों पर राहत एवं बचाव दलों के पहुंचने में देरी हुई, जबकि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भी देखने को मिली।
हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) के नेतृत्व में आयोजित इस अभ्यास में जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ, होमगार्ड, सिविल डिफेंस सहित विभिन्न विभागों और स्थानीय समुदायों ने भाग लिया। मॉक ड्रिल का संचालन मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सुधीर बहल और विशेष सचिव (आपदा प्रबंधन) डॉ. पुष्पेंद्र राणा की निगरानी में किया गया।

एंबुलेंस जाम में फंसी, मरीजों को पहुंचाने में हुई देरी
राजधानी शिमला में अभ्यास के दौरान एंबुलेंस को मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में 15 से 20 मिनट का अतिरिक्त समय लगा। सब्जी मंडी क्षेत्र से डीडीयू अस्पताल तक पहुंचने में हुई देरी ने यातायात प्रबंधन और आपातकालीन मार्गों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।
विभिन्न आपदा परिदृश्यों का किया गया अभ्यास
सुबह नौ बजे शुरू हुए इस अभ्यास में आपातकालीन संचालन केंद्र (ईओसी), घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस), स्टेजिंग एरिया और इंसिडेंट कमांड पोस्ट को सक्रिय किया गया। विभिन्न जिलों में भूकंप, बादल फटने और वनाग्नि की काल्पनिक परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों की परख की गई। कुल्लू और किन्नौर में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) और आफ्टरशॉक जैसी स्थितियों का भी अभ्यास किया गया।

संचार और सूचना आदान-प्रदान में भी दिखी कमजोरी
निरीक्षण के दौरान कई जिलों में विभागों के बीच अपेक्षित स्तर का तालमेल नहीं दिखा। कुछ स्थानों पर संचार व्यवस्था प्रभावित रही, जिससे सूचना के आदान-प्रदान में देरी दर्ज की गई। इसके अलावा राहत दलों और संसाधनों की प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच भी अपेक्षा से धीमी रही। हालांकि अधिकारियों ने माना कि इस बार का प्रदर्शन पिछले अभ्यासों की तुलना में बेहतर रहा, लेकिन सामने आई कमियों ने आपदा प्रबंधन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया।
जिलों को दिए गए सुधारात्मक निर्देश
मॉक ड्रिल के बाद जिलों को चिकित्सा आपातकालीन सेवाओं के लिए संसाधन और बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं को नियमित रूप से अपडेट करने, यातायात एवं निकासी प्रबंधन को मजबूत बनाने तथा संचार तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।
एचपीएसडीएमए ने कहा कि नियमित मॉक ड्रिल, क्षमता निर्माण और आधुनिक संचार प्रणाली के माध्यम से ही किसी भी बड़ी आपदा के दौरान प्रभावी, त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकती है।