दैनिक खबरनामा। मंडी, 14 जून :  कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले लाखों यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मंडी जिले के अत्यधिक भूस्खलन प्रभावित चार मील और नौ मील क्षेत्र में चार नई यातायात सुरंगों (टनल) के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रदेश सरकार की प्रोजेक्ट स्क्रीनिंग कमेटी (पीएससी) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान कर दी है।

मंजूरी मिलने के बाद अब वन विभाग के माध्यम से प्रस्ताव को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पास वन स्वीकृति (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) के लिए भेजा जाएगा। आवश्यक अनुमति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

चार और नौ मील का क्षेत्र हर मानसून में भूस्खलन और पहाड़ दरकने की घटनाओं के कारण सबसे अधिक प्रभावित रहता है। हल्की बारिश के बाद भी यहां यातायात बाधित हो जाता है, जिससे यात्रियों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है और कई बार मार्ग दिनों तक बंद रहता है। नई सुरंगों के निर्माण से इस समस्या का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है।

मानसून में भी नहीं थमेगा यातायात

सुरंगों के बनने के बाद बारिश के मौसम में भी वाहनों की आवाजाही सुचारु बनी रहेगी। यात्रियों को न तो गिरते पत्थरों का डर रहेगा और न ही लंबे ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ेगा। पर्यटन और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मार्ग पर सालभर निर्बाध यातायात सुनिश्चित हो सकेगा।

ऐसी होंगी चारों सुरंगें

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार, भूस्खलन प्रभावित संकरे हिस्से को बाईपास करने के लिए कुल चार सुरंगों का निर्माण किया जाएगा।

दो सुरंगों की लंबाई 781-781 मीटर होगी, जो शुरुआती संवेदनशील हिस्सों को पार करेंगी।

दो मुख्य सुरंगों की लंबाई 2-2 किलोमीटर होगी, जो पहाड़ी के नीचे से होकर गुजरेंगी। सभी सुरंगों में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, अत्याधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम और बेहतर यातायात प्रबंधन सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन सुरंगों के निर्माण से फोरलेन पर वाहनों की रफ्तार बनी रहेगी और सफर अधिक सुरक्षित व सुगम होगा।

वन स्वीकृति के बाद शुरू होगा निर्माण

पीएससी से प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना की फाइल आगे की प्रक्रिया के लिए भेज दी गई है। केंद्रीय मंत्रालय से फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट के तहत मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर निर्माण कार्य धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा।

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