दैनिक खबरनामा। शिमला, 14 जून : हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। पहली बार विभाग ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति कर रहा है जिन्हें किसी पारंपरिक पदनाम के बजाय विशेष शैक्षणिक सुधार की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनका मुख्य कार्य नियमित पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की गणित और अंग्रेजी विषयों में मौजूद कमियों को दूर करना होगा।
प्रदेश के सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों में 308 गणित शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि 305 अंग्रेजी शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी फाइल सरकार को भेजी गई है। उम्मीद है कि इनके नियुक्ति आदेश सोमवार या मंगलवार तक जारी कर दिए जाएंगे।
ये शिक्षक प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक विद्यार्थियों के साथ कार्य करेंगे। स्कूलों के प्रधानाचार्य यह तय करेंगे कि शिक्षक किस कक्षा में और किस अवधि के दौरान विद्यार्थियों की शैक्षणिक कमजोरियों को दूर करने का कार्य करेंगे। नियमित पाठ्यक्रम के अध्यापन के लिए अलग से शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
यह भर्ती ‘स्कीम फॉर सीबीएसई एफिलिएटेड स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस इन हिमाचल प्रदेश’ के तहत बनाई गई विशेष उप-योजना के अंतर्गत की जा रही है। इससे पहले पीटीए, पैरा, पैट और एसएमसी आधार पर नियुक्त शिक्षकों के पदनाम स्पष्ट होते थे, लेकिन इस बार नियुक्त शिक्षकों को किसी विशिष्ट श्रेणी में नहीं रखा गया है।
इन शिक्षकों की नियुक्ति पांच वर्षों के लिए की जाएगी। उन्हें प्रतिमाह 30 हजार रुपये का निश्चित मानदेय मिलेगा। हालांकि, वर्ष में केवल 10 माह का ही वेतन दिया जाएगा और अवकाश अवधि के दो महीनों का मानदेय नहीं मिलेगा।
शिक्षा विभाग इन शिक्षकों के लिए एक विशेष पाठ्यक्रम भी तैयार करेगा, जो मौजूदा सिलेबस के अतिरिक्त होगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की गणितीय क्षमता, अंग्रेजी दक्षता और समग्र अधिगम स्तर में सुधार लाना है।
उधर, राजकीय अध्यापक संघ ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान का कहना है कि बिना पदनाम के शिक्षकों की नियुक्ति भविष्य में विभाग के लिए प्रशासनिक और नीतिगत चुनौतियां पैदा कर सकती है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को शनिवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के साथ हुई बैठक में भी प्रमुखता से उठाया गया है।