दैनिक खबरनामा । शिमला, 16 जून : हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और उससे जुड़े विभिन्न उपक्रमों में की जा रही आउटसोर्स भर्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में कोई भी नियुक्ति निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों (R&P Rules) के विपरीत नहीं की जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि भर्ती नियमों को दरकिनार कर आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियां करना न केवल मनमाना है, बल्कि यह समान अवसर के सिद्धांत के भी विपरीत है। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार वित्तीय बचत का तर्क देकर बेरोजगार युवाओं का शोषण नहीं कर सकती।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग में पहले कर्मचारियों को आउटसोर्स आधार पर नियुक्त किया जाता है और बाद में उन्हें रोगी कल्याण समिति (RKS) में समाहित कर लिया जाता है। अदालत ने इसे भर्ती प्रक्रिया के लिए एक “पिछला दरवाजा” (Backdoor Entry) बताते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उसके पास विभिन्न विभागों और सरकारी उपक्रमों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस पर हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव और वित्त सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे।
खंडपीठ ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त कर उनके श्रम का शोषण किया जा रहा है। जबकि विभागों में नियमित रिक्त पद मौजूद हैं, इसके बावजूद वैधानिक भर्ती प्रक्रिया अपनाने के बजाय आउटसोर्सिंग का सहारा लिया जा रहा है, जिससे पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
17 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत
अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा रिक्त पदों और आउटसोर्स नियुक्तियों का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार राज्य के 42 संस्थानों में लगभग 17,114 कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं।
इनमें प्रमुख रूप से:
पुलिस महानिदेशक कार्यालय में 630 कर्मचारी
जल शक्ति विभाग में 542 कर्मचारी
हिमाचल प्रदेश विद्युत निगम लिमिटेड में 1,473 कर्मचारी
ग्रामीण विकास विभाग में 632 कर्मचारी
कृषि निदेशालय में 803 कर्मचारी
पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय में 793 कर्मचारी
चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय में 2,578 कर्मचारी नियुक्त हैं।
7 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर सार्वजनिक महत्व का बताते हुए इसकी अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित की है। माना जा रहा है कि इस मामले का प्रभाव राज्य की भर्ती नीतियों और हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ सकता है।