दैनिक खबरनामा । शिमला, 16 जून : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बहुचर्चित चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े बेनामी संपत्तियों और हिमाचल प्रदेश भूमि सुधार एवं किरायेदारी अधिनियम की धारा 118 के कथित उल्लंघन के मामले में पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता समेत राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों से अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ ने याचिका में प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद यह आदेश पारित किया।
नगर निगम शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र सिंह पंवर द्वारा दायर जनहित याचिका में राज्य सरकार, गृह सचिव, राजस्व सचिव, उपायुक्त सोलन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिमला, नगर आयुक्त सोलन, नगर निगम सोलन, उपमंडल अधिकारी सोलन तथा मैसर्स एनजी एस्टेट चेस्टर हिल को प्रतिवादी बनाया गया है।
इस मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित है, जिसे अधिवक्ता विनय शर्मा ने दायर किया है। उन्होंने चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट से संबंधित कथित अनियमितताओं और बेनामी संपत्तियों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक कृषक, जिसकी वार्षिक आय वर्ष 2017 तक लगभग छह लाख रुपये थी, उसकी आय को कुछ वर्षों में असामान्य रूप से बढ़ाकर दर्शाया गया। साथ ही उसके नाम पर करीब 275 बीघा भूमि खरीदे जाने का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कृषकों के नाम पर धारा 118 के तहत अनुमति प्राप्त कर प्रोजेक्ट डेवलपर्स ने निर्माण गतिविधियां शुरू कीं।
याचिकाकर्ता ने पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका के अनुसार, राजस्व सचिव के रूप में कार्यकाल के दौरान उन्होंने कथित तौर पर प्रोजेक्ट डेवलपर्स के पक्ष में गैरकानूनी फैसले लिए। इसके बदले में प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों से करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि नाममात्र कीमत पर खरीदने का आरोप लगाया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की है।