दैनिक खबरनामा । नई दिल्ली, 18 जून : भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती मांग और बैटरी निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 1,500 करोड़ रुपये की क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग योजना शुरू की है। कोयला एवं खान मंत्रालय ने बैटरी समिट 2026 के दौरान इस महत्वाकांक्षी पहल की घोषणा की।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य पुरानी और अनुपयोगी हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों की वैज्ञानिक एवं संगठित तरीके से रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसी महत्वपूर्ण धातुओं को दोबारा प्राप्त किया जाएगा, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं।
आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम
भारत वर्तमान में इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। सरकार का मानना है कि रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाने से घरेलू स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और विदेशी आयात पर निर्भरता में कमी आएगी। इससे न केवल आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, बल्कि बैटरी निर्माण की लागत भी कम करने में मदद मिलेगी।
तेजी से बढ़ रही है बैटरी की मांग
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) परियोजनाओं के विस्तार के कारण लिथियम-आयन बैटरियों की मांग लगातार बढ़ रही है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, भारत में बैटरी की वार्षिक मांग वर्ष 2022 के 20 गीगावॉट-घंटे (GWh) से बढ़कर वर्ष 2030 तक 220 GWh तक पहुंच सकती है।
इसी के साथ बैटरी आयात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2019 में जहां लिथियम-आयन बैटरियों का आयात लगभग 1.2 अरब डॉलर था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 4.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
घरेलू बैटरी इकोसिस्टम को मिलेगा बल
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम विकसित करने के लिए रीसाइक्लिंग क्षमता को मजबूत करना होगा। उनके अनुसार, यह पहल महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने, आपूर्ति संबंधी जोखिमों को कम करने और घरेलू उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होगी।
प्रोसेसिंग पार्क और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तैयारी
सरकार क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी बड़े निवेश की योजना बना रही है। इसके तहत देश में चार क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क और नौ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों का उद्देश्य तकनीकी क्षमता बढ़ाना, अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और देश में वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना है।
खनिज संसाधनों की सुरक्षा पर जोर
सरकार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास भी तेज कर रही है। वर्ष 2015 से अब तक 570 से अधिक खनिज अन्वेषण परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जबकि देशभर में 46 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों की नीलामी की गई है। इसके अलावा, दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा के लिए अर्जेंटीना सहित कई देशों में खनिज संपत्तियों तक पहुंच बनाने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भारत के इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को नई गति देने के साथ-साथ देश को स्वच्छ ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।