दैनिक खबरनामा । शिमला, 24 जून : राज्य महिला आयोग ने सुनवाई में लगातार अनुपस्थित रहने वाले पक्षों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि दो बार नोटिस जारी होने के बावजूद यदि कोई पक्ष सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है, तो उसे पुलिस की मदद से घर से लाकर आयोग के समक्ष पेश किया जाएगा। आयोग का कहना है कि बार-बार गैरहाजिरी के कारण मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा।
मंगलवार को आयोग के समक्ष विभिन्न शिकायतों से जुड़े 40 मामलों की सुनवाई निर्धारित थी। इनमें से केवल 22 मामलों पर ही सुनवाई हो सकी, जबकि शेष मामलों में एक या दोनों पक्षों की अनुपस्थिति के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई। आयोग ने ऐसे मामलों में नई तारीख निर्धारित करते हुए संबंधित पक्षों को अंतिम अवसर दिया है।
वर्षों से लंबित हैं कई मामले
महिला आयोग के समक्ष कई शिकायतें वर्षों से लंबित पड़ी हैं। कुछ मामले ऐसे भी हैं जो पिछले पांच से छह वर्षों से निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आयोग ने कहा कि बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद पक्षों के उपस्थित न होने से मामलों के समाधान में देरी हो रही है। ऐसे में पीड़ित महिलाओं को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए सख्त कदम उठाना आवश्यक हो गया है।
जवाब देने से बच रहे कई पक्ष
आयोग के अनुसार अनेक शिकायतों में जवाब देने के लिए बुलाए गए दूसरे पक्ष के लोग सुनवाई में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इससे शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ऐसे मामलों में अब पुलिस की सहायता लेकर संबंधित व्यक्तियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।
बिना औपचारिक शिकायत के बुलाने पर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान आयोग के सामने कुछ ऐसे मामले भी आए, जिनमें महिला की ओर से विधिवत शिकायत दर्ज किए बिना ही ससुराल पक्ष को बुलाकर समझौते के प्रयास किए गए थे। आयोग ने बताया कि ऐसे पांच मामले सामने आए हैं, जिनमें निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे मामलों के निस्तारण में जटिलताएं बढ़ीं।
आयोग ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में नियमानुसार शिकायत दर्ज होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए, ताकि मामलों का निष्पक्ष और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।