दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 28 जून : जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह सहित 15 कांग्रेस नेताओं को करीब दो वर्ष पुराने आपराधिक मामले में बड़ी राहत मिली है। चंडीगढ़ जिला अदालत ने पुलिस द्वारा पेश की गई कैंसलेशन रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज केस को समाप्त कर दिया है।
यह मामला 20 फरवरी 2024 का है, जब सेक्टर-3 थाना पुलिस ने परगट सिंह और अन्य नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने पुलिस कार्रवाई में बाधा पहुंचाई, सरकारी कार्य में हस्तक्षेप किया और जिला प्रशासन के आदेशों का उल्लंघन किया।
जांच प्रक्रिया के दौरान पुलिस को आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने अदालत में मामले को रद्द करने के लिए कैंसलेशन रिपोर्ट दाखिल की। जिला अदालत ने रिपोर्ट पर सहमति जताते हुए केस बंद करने की अनुमति दे दी।
रिकॉर्ड के अनुसार, 20 फरवरी 2024 को कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पंजाब-हरियाणा सीमा पर किसानों के खिलाफ कथित बल प्रयोग के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी झंडे लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री के आवास की ओर बढ़ने लगे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन जारी रहा।
इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए। पुलिस का आरोप था कि घटना में कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए, जिसके बाद कई नेताओं को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
इस बीच, इसी तरह के एक अन्य मामले में चंडीगढ़ प्रशासन ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं के खिलाफ कानूनी लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया है। लगभग पांच वर्ष पहले हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वर्तमान मुख्यमंत्री भगवंत मान, अमन अरोड़ा, हरपाल चीमा और अन्य नेताओं के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था।
बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मान और अन्य नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया था। हालांकि, चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचाया, जहां कानूनी प्रक्रिया जारी है।