दैनिक खबरनामा । नई दिल्ली, 1 जुलाई : गुरुग्राम में कॉमेडियन प्रणित मोरे के कार्यक्रम के दौरान किए गए ‘370 रुपये की बिरयानी’ संबंधी टिप्पणी का हवाला देते हुए बुधवार को उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है।
याचिका में स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार सामग्री के लिए नियामक ढांचा स्थापित करने की मांग उठाई गई है।
यह याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दाखिल की गई है। इसमें हाल में ऑनलाइन प्रसारित हुई उस भ्रामक सूचना का भी उल्लेख है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि भारत के कई न्यायाधीशों और केंद्रीय मंत्रियों ने करदाताओं के पैसे का उपयोग कर लंदन में आयोजित बैडमिंटन प्रतियोगिता में भाग लिया।
झूठी खबरें फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग
याचिका में कहा गया कि इस प्रकार की फर्जी खबरें बेहद कम समय में व्यापक रूप से फैल जाती हैं। ऐसी भ्रामक सूचनाएं संवैधानिक संस्थानों की कार्यप्रणाली, स्वतंत्रता और गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
तिवारी ने याचिका में तर्क दिया कि वर्तमान कानूनी व्यवस्था अधिकतर मामलों में घटना घटने के बाद ही सक्रिय होती है, जब तक भ्रामक सूचना वायरल होकर अपूरणीय क्षति पहुंचा चुकी होती है।
स्पष्टीकरण आने तक नुकसान हो चुका होता है
याचिका में उल्लेख किया गया, ‘जब तक तथ्य-जांच या आधिकारिक खंडन सामने आता है, तब तक लाखों लोग गलत जानकारी देख, साझा कर और उस पर विश्वास कर चुके होते हैं, जिससे क्षति हो जाती है।’
इसमें आगे कहा गया, ‘चाहे वह टिप्पणी हास्य, व्यंग्य, संवाद या मनोरंजन के रूप में की गई हो, एल्गोरिदम के जरिए उसका प्रसार एक सीमित बात को महिलाओं की गरिमा, सहमति, निजता, सार्वजनिक नैतिकता और संवैधानिक दायित्व से जुड़ी राष्ट्रीय बहस में बदल देता है।’
याचिका की मुख्य मांगें
याचिका में विभिन्न सोशल मीडिया मंचों और डिजिटल प्रकाशनों पर प्रसारित होने वाली भ्रामक, अपमानजनक और मानहानिकारक सामग्री की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है।