दैनिक खबरनामा । श्रीनगर, 3 जुलाई: जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दिल्ली और अमृतसर जैसे महानगरों जैसी जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रधानमंत्री फंड के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर को 275 AI-संचालित पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें, 9 हाई-टेक MRI यूनिट्स और 4 डिजिटल मैमोग्राफी उपकरण दिए जा रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में TB जांच होगी तेज
275 AI-आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों को खासतौर पर पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। इनसे क्षय रोग यानी टीबी की जांच कुछ मिनटों में ही संभव होगी। अब मरीजों को जांच के लिए जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज का रुख नहीं करना पड़ेगा।
न्यूरो और ऑर्थो जांच में मिलेगी आसानी
प्रदेश को 9 नई 1.5 टेस्ला क्षमता वाली MRI मशीनें मिल रही हैं। इनसे मस्तिष्क, हड्डी और अन्य जटिल रोगों की पहचान बेहतर तरीके से हो सकेगी। इससे लंबी प्रतीक्षा सूची और निजी लैब्स पर होने वाले खर्च से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
महिलाओं के लिए स्तन कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग
4 डिजिटल मैमोग्राफी यूनिट्स की मदद से स्तन कैंसर का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकेगा। समय रहते बीमारी पकड़ में आने से इलाज शुरू होने में देरी नहीं होगी, जिससे हजारों मरीजों को फायदा होगा।
कैसे लागू होगी योजना?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच इस संबंध में MoU पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। केंद्र सरकार अपनी अधिकृत एजेंसियों के जरिए इन सभी उपकरणों की खरीद, आपूर्ति और स्थापना कराएगी। आने वाले महीनों में चरणबद्ध तरीके से ये मशीनें अस्पतालों तक पहुंचाई जाएंगी।
जम्मू-कश्मीर का स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में जुटा है। चयनित अस्पतालों में बिजली, जरूरी कमरे और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था की जा रही है। विभाग का लक्ष्य है कि मशीनें लगते ही अगले दिन से जांच सेवा शुरू कर दी जाए।
विशेषज्ञों ने बताया क्यों है यह अहम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि AI-युक्त पोर्टेबल एक्स-रे सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। कुपवाड़ा, पुंछ, डोडा जैसे जिलों में जहां रेडियोलॉजिस्ट की कमी है, वहां AI रिपोर्ट तैयार करने में मदद करेगा। इससे मरीजों को बिना वजह रेफर करने की जरूरत कम होगी और इलाज जल्दी शुरू हो सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू और मुख्य सचिव अटल डुल्लू इस पूरी परियोजना की निगरानी कर रहे हैं। मुख्य फोकस सरकारी अस्पतालों को आधुनिक बनाकर शहर और गांव की स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच के अंतर को कम करना है।
आम लोगों को क्या मिलेगा लाभ?
– गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान
– समय और धन दोनों की बचत
– अपने जिले में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच सुविधा
– ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच का फासला कम होगा
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह पहल जम्मू-कश्मीर को तकनीक आधारित और जनता-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली की ओर ले जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों में इसे सबसे बड़ी पहल माना जा रहा है।