दैनिक खबरनामा । नई दिल्ली, 4 जुलाई: पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इथेनॉल कोई नया या प्रायोगिक ईंधन नहीं है। सरकार का कहना है कि इसका उपयोग दुनिया के कई देशों में एक सदी से भी अधिक समय से परिवहन ईंधन के रूप में किया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
हाल के दिनों में E20 ईंधन को लेकर यह दावा किया गया कि इससे वाहनों का माइलेज प्रभावित हो रहा है, इंजन में तकनीकी समस्याएं आ रही हैं और कुछ मामलों में बीमा दावों पर भी असर पड़ा है। इन दावों पर सरकार ने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरकार के अनुसार, भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में चल रहे प्रयासों के अनुरूप है। अमेरिका में E10 (10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लंबे समय से मानक ईंधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। अमेरिकी सरकार के समर्थन से E15 भी बाजार में उपलब्ध है, जबकि वहां लाखों फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFVs) E85 तक के इथेनॉल मिश्रण पर संचालित होते हैं।
इसी तरह, इथेनॉल उपयोग के मामले में अग्रणी ब्राजील ने पेट्रोल में E27 (27 प्रतिशत इथेनॉल) मिश्रण को अनिवार्य कर रखा है। हाल ही में ब्राजील ने इस मिश्रण को बढ़ाकर लगभग 35 प्रतिशत करने का निर्णय भी लिया है।
सरकार ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने दिसंबर 2025 में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया था। वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर मई 2026 तक इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसी अवधि में किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, लगभग 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई और 310 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के स्थान पर इथेनॉल का उपयोग किया गया।